डेढ़ लाख उज्ज्वला कनेक्शन वर्षों से नहीं हुए रीफिल
प्रयागराज में उज्ज्वला योजना के लगभग डेढ़ लाख कनेक्शनों की स्थिति चिंताजनक है। कई उपभोक्ता वर्षों से गैस सिलेंडर रीफिल नहीं करवा पाए थे, जिसके कारण आर्थिक स्थिति की जांच का आदेश दिया गया है। इसके पीछे की वजह महंगी रीफिल और उपभोक्ताओं की पात्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रयागराज। रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती जरूरत के बीच उज्ज्वला योजना के करीब डेढ़ लाख कनेक्शन की हकीकत सामने आई है। इन कनेक्शनधारकों ने कई वर्षों से सिलेंडर रीफिल ही नहीं कराया था। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के बाद गैस आपूर्ति को लेकर संकट गहराने की आशंका हुई तो बड़ी संख्या में उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों पर पहुंचने लगे। इसके बाद वर्षों से निष्क्रिय पड़े उज्ज्वला कनेक्शनों की स्थिति सामने आई। दरअसल, उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए थे। शुरुआत में कई परिवारों ने कनेक्शन तो ले लिया, लेकिन महंगी रीफिल के कारण लगातार सिलेंडर भरवाना उनके लिए मुश्किल रहा। नतीजा यह रहा कि बड़ी संख्या में कनेक्शन लेने के बाद उपभोक्ताओं ने दोबारा सिलेंडर ही नहीं भरवाया। कई कनेक्शन तो वर्षों से रीफिल का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच लंबे समय बाद शासन की ओर से उज्ज्वला कनेक्शनधारकों के खातों में सब्सिडी की राशि भेजी गई। इसके बाद भी कई ऐसे उपभोक्ता सामने आए, जिन्होंने लंबे अंतराल के बाद सिलेंडर रीफिल कराया। इससे विभागीय अधिकारियों के सामने कनेक्शनधारकों की वर्तमान आर्थिक स्थिति और पात्रता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जब इसकी रिपोर्ट आई तो डीएम मनीष कुमार वर्मा ने डीएसओ सुनील सिंह से इसकी विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। आखिर इन लोगों का काम कैसे चल रहा था。
अब फिर होगी पात्रता की जांच
डेढ़ लाख कनेक्शन के लंबे समय से रीफिल न होने के बाद शासन स्तर से सभी कनेक्शनधारकों की आर्थिक स्थिति की एक बार फिर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि लाभार्थी वर्तमान में भी उज्ज्वला योजना के लिए पात्र हैं या नहीं। साथ ही लंबे समय से गैस न भरवाने के कारणों की भी जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि जांच के बाद योजना के वास्तविक लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और अपात्र लोगों को मिल रहे लाभ की भी पहचान की जा सकेगी।


