Bijnor News: सजा के बाद 12 नामजद लोगों की भी बढ़ी बेचैनी
Bijnor News: प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वादी पक्ष ने 12 अन्य लोगों के नाम भी अभियुक्त के रूप में लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है, जिससे इन 12 लोगों के खिलाफ मामला चलाने का रास्ता साफ हो सकता है।

Bijnor News: प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद अब उन 12 लोगों के नाम भी फिर चर्चा में हैं, जिनके संबंध में वादी पक्ष ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में उन्हें भी अभियुक्त के रूप में तलब करने की मांग की थी। फैसले के बाद शहर के कानूनी और कारोबारी हलकों में इस पहलू को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मृतक की बहन का बयान
मृतक की बहन प्राची अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान तत्कालीन धारा 319 सीआरपीसी के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि गवाहों के बयानों में विचाराधीन आरोपियों के अलावा 12 अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। गवाह प्राची अग्रवाल, अनुराग रस्तौगी एवं रामकुमार अग्रवाल चश्मदीद साक्ष्यों ने पूरी घटना को बताया। घटना में सचिन अग्रवाल पुत्र राजेश अग्रवाल निवासी आवास विकास कालोनी, रविन्द्र अग्रवाल पुत्र रोशन अग्रवाल (नमकीन वाले) निवासी मौहल्ला जाटान, दीपांशु उर्फ दीपू पुत्र विजय अग्रवाल (लच्छुमल का पोता) निवासी मौहल्ला जाटान, संजीव सिंघल पुत्र शैलेन्द्र व अर्पित पुत्र संजीव निवासी मौहल्ला रम्मू का चौराहा निकट तहसील, अरविन्द अग्रवाल पुत्र चन्द्रप्रकाश अग्रवाल वैरायटी वाला निवासी पंचवटी कालोनी नई बस्ती, अजय अग्रवाल उर्फ राजू पुत्र ब्रजनन्दन (गंज क्लाथ हाउस) निवासी नीलकमल टाकीज नई बस्ती, रजनीश अग्रवाल पुत्र त्रिलोकी अग्रवाल (बाबू साईकल वाले), मोनू पुत्र रजनीश व घनश्यामदास गुप्ता पुत्र गणेशी (गुप्ता चक्की वाले), संजू पुत्र घनश्यामदास गुप्ता निवासीगण नई बस्ती शहर कोतवाली व राजू पुत्र सन्तोष शहनाई बैंकट हाल वाला निवासी झालू थाना हल्दौर के नाम सामने आए थे।
फैसले के बाद बढ़ी चिंता
मामले में सजा सुनाए जाने के बाद इन 13 लोगों और उनके परिजनों के बीच भी बेचैनी है। कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी चर्चित मुकदमे में फैसला आने के बाद उससे जुड़े हर पहलू पर दोबारा नजर डाली जाती है। ऐसे में वादी पक्ष की ओर से पूर्व में दिए गए आवेदन की भी चर्चा होना स्वाभाविक है।
हाईकोर्ट में याचिका पर 4 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित
मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता अहमद जकावत ने बताया कि प्रारंभिक एफआईआर में पांच लोगों को नामजद किया गया था। बाद में प्रार्थना पत्र के जरिए 12 अन्य लोगों के नाम भी पुलिस को दिए गए थे। जांच के दौरान इन नामों पर विचार किया गया, लेकिन चार्जशीट में उन्हें शामिल नहीं किया गया। इन 12 लोगों को भी आरोपी बनाए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर 4 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। यदि हाईकोर्ट याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देता है, तो इन 12 लोगों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो सकता है।
सिफारिशों की हुई थी चर्चा
शहर में यह चर्चा भी है कि विवेचना के दौरान कुछ प्रभावशाली लोगों और व्यापारिक वर्ग के हस्तक्षेप से कुछ नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं हो सके थे। प्रबल हत्याकांड के बाद वैश्य समाज में खौफ का माहौल था। काफी लोग पुलिस कार्रवाई के डर से दूसरे शहर अपनी रिश्तेदारों में चले गए थे।
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