अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों की तनख्वाह पर संकट, 93 करोड़ के हिसाब में उलझा शिक्षा विभाग 2016 की अगलगी में जले रिकॉर्ड अब बने मुसीबत, दशक भर पुराने भुगतान का सत्यापन अटका 23 जिलों के अल्पसंख्यक विद्यालयों को दी गई राशि का हिसाब ढूंढ़ने में जुटा शिक्षा विभाग 2006 से 2012 के बीच बंटे 93.46 करोड़ के स्वीकृति आदेश गायब, अब जिलों से मांगी जा रही कॉपी जब तक राशि समायोजित नहीं होगी, तब तक मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूलों को नहीं मिलेगा वेतन मद पटना, नालंदा, गया, भागलपुर सहित सभी बड़े जिलों के डीईओ से मांगी जा रहीं पुरानी फाइलें फोटो : डीईओ : डीईओ कार्यालय। बिहारशरीफ, कार्यालय संवाददाता। नालंदा समेत सूबे के मान्यता प्राप्त अराजकीय अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों-कर्मियों के वेतन भुगतान पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। वित्त विभाग ने इन विद्यालयों को पूर्व में आवंटित राशि का समायोजन (एडजस्टमेंट) पूरा होने तक वेतन भुगतान के लिए नई राशि आवंटित करने पर रोक लगा दी है।
कमियों का जांच
समस्या यह कि जिन स्वीकृति आदेशों (सैंक्शन ऑर्डर) के आधार पर जिलों को पूर्व में राशि भेजी गई थी, उनकी मूल प्रति माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में उपलब्ध ही नहीं है। क्योंकि, वर्ष 2016 में निदेशालय में लगी आग में कई महत्वपूर्ण संचिकाएं (फाइलें) जलकर नष्ट हो गई थीं। करीब साढ़े 93 करोड़ का पेच : माध्यमिक उप निदेशक संजीव कुमार द्वारा 12 सितंबर को जारी पत्र के अनुसार वर्ष 2006 से 2012 के बीच चार अलग-अलग आदेशों के जरिये कुल 93 करोड़ 46 लाख 38 हजार 850 रुपए अल्पसंख्यक विद्यालयों के लिए जिलों को भेजे गये थे। इसमें 2 जनवरी 2006 को छह आदेशों के तहत 11 करोड़ 45 लाख नौ हजार 850 रुपए, 23 सितंबर 2009 को चार आदेशों के तहत 27 करोड़ एक लाख 20 हजार, 21 जून 2010 को सबसे बड़ी राशि 522 आदेशों के जरिए 47 करोड़ 66 लाख नौ हजार रुपए, तो 5 मार्च 2012 को 89 आदेशों के तहत सात करोड़ 34 लाख रुपए शामिल हैं।
भुगतान में देरी
रिकॉर्ड नहीं, जिलों से मांगी मदद : चूंकि आग में मूल दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं, ऐसे में निदेशालय के पास अब इन भुगतानों का वित्त विभाग को समायोजन दिखाने के लिए कोई प्रमाण नहीं बचा। इसी वजह से उप निदेशक ने 23 जिलों पटना, नालंदा, भोजपुर, रोहतास, जहानाबाद, गया, नवादा, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, दरभंगा, समस्तीपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सहरसा, मुंगेर, खगड़िया, शेखपुरा, भागलपुर व बांका के डीईओ व स्थापना डीपीओ को पत्र लिखकर आदेशों की प्रतियां भेजने को कहा है।
प्रभावित शिक्षक-कर्मचारी
जब तक हिसाब नहीं, तब तक भुगतान अटका : पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जब तक इन पुराने आवंटनों का समायोजन नहीं हो जाता, तब तक अल्पसंख्यक विद्यालयों के वेतन भुगतान के लिए वित्त विभाग नई राशि जारी नहीं करेगा। यानी, दशक भर पहले के कागजी हिसाब-किताब की गुत्थी सुलझाए बगैर वर्तमान में पढ़ा रहे शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन फंसा रह सकता है। इससे सैकड़ों अल्पसंख्यक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की परेशानी बढ़ना तय है। अधिकारी बोले : नालंदा जिले के मान्यता प्राप्त अराजकीय अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों-कर्मियों के वेतन भुगतान से संबंधित दस्तावेज खंगालने का अनादेश दिया गया है। ताकि, आदेश की प्रति निदेशालय को भेजी जा सके। हेमचंद्र, जिला शिक्षा पदाधिकारी बॉक्स : शिक्षक-कर्मियों का डिजिटल डेटा खंगालेगा शिक्षा विभाग, 3 दिन की डेडलाइन गूगल शीट पर 23 जिलों के डीईओ को देनी होगी 14 बिंदुओं वाली विस्तृत सूची हर विद्यालय के शिक्षक की नियुक्ति तिथि, वेतनमान, महंगाई भत्ता व आवास भत्ता तक देना होगा ब्योरा बिहारशरीफ, कार्यालय संवाददाता। नालंदा समेत सूबे के मान्यता प्राप्त अराजकीय अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों का पूरा लेखा-जोखा डिजिटल रूप से खंगाला जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 23 जिलों को गूगल शीट के जरिये विद्यालयवार शिक्षकों-कर्मियों का पूरा ब्योरा तीन दिनों में ऑनलाइन दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया है। माध्यमिक शिक्षा उप निदेशालय संजीव कुमार ने 23 जिलों पटना, नालंदा, भोजपुर, रोहतास, जहानाबाद, गया, नवादा, सारण, सिवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, दरभंगा, समस्तीपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सहरसा, मुंगेर, खगड़िया, शेखपुरा व भागलपुर के डीईओ व स्थापना डीपीओ को पत्र भेजा है। भेजे गये लॉर्मेट में जिले का नाम, मान्यता प्राप्त अराजकीय अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों की कुल संख्या, विद्यालय का नाम, कर्मियों की सूची (नाम व पदनाम सहित), विभाग द्वारा अनुमोदित होने की स्थिति, नियुक्ति की तिथि जैसे बुनियादी विवरण शामिल हैं। इसके साथ ही, मूल वेतन, डियरनेस अलाउंस (महंगाई भत्ता), मकान किराया भत्ता (हाउस रेंट अलाउंस), आवास भत्ता, यात्रा भत्ता जैसी वित्तीय जानकारियां भी भरनी होंगी।