जिले में अब तक 20 फीसदी भी नहीं हो पायी है धान की रोपनी

हिन्दुस्तान, अररिया
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अररिया में मौसम की बेरुखी के कारण धान की खेती पर संकट मंडराने लगा है। खरीफ सीजन में कम बारिश के चलते किसानों को धान की रोपनी में दिक्कतें आ रही हैं। पर्याप्त पानी न होने से फसल की स्थिति खराब हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि पंपसेट के माध्यम से किसानों ने कुछ रोपाई की है।

जिले में अब तक 20 फीसदी भी नहीं हो पायी है धान की रोपनी

अररिया, निज प्रतिनिधि मौसम की बेरूखी से धान की खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खरीफ सीजन में इस बार जरूरत से काफी कम बारिश होने के चलते धान के खेतिहर किसानों का हाल बेहाल है।

किसानों की दिक्कतें

धान के बिचरा गिराने के बाद अब धान की रोपनी में भी किसानों को मौसम साथ नहीं दे रहा है। किसानों को पहले धान का बिचरा गिराने में मौसम की मार झेलनी पड़ी, फिर जैसे-तैसे कर अब बिचरा तैयार हो रहा है तो अब बारिश की दरकार है। धान की रोपनी के लिये पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। जिन किसानों ने बिचरा तैयार हो जाने के बाद धान की रोपनी कर भी दिया तो पानी के अभाव में धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी और धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। किसानों को धान के फसल को बचाने में पसीने छूटने लगे हैं। आसमान में बादल तो उमड़-घुमड़ रहे हैं मगर जोरदार बारिश नहीं होने के चलते धान के पौधे को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रही है। जिले के ऊंचे व नीचे इलाकों में इन दिनों कमोवेश यही स्थिति बनी हुई है। ऊंचे खेतिहर किसान तो बारिश की आस में आसमान की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं ही, निचले इलाके में भी बारिश की दरकार है। हर जगह खेतों में पानी डालने के लिये किसान परेशान हैं। किसान कहीं पंपसेट के सहारे तो कहीं मोटर चालित पंपसेट के जरिये फिलहाल खेतों में पानी डालकर धान की रोपनी में किसान जुटे हैं। पंपसेट के सहारे खेतों में पानी डालने में उनके सांस फूलने लगे हैं।

गारंटी का संकट

जानकारों का कहना है, धान के खेतों में तकरीबन एक माह तक पानी लगा रहना चाहिये। धान की खेती के लिए सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि बारिश वाला मौसम भी जरूरी है। तभी उत्पादन अच्छी हो सकती है, लेकिन जिले में न तो पर्याप्त बारिश हो रही है और ना ही नहरों का पानी सही ढंग से किसानों का साथ दे रहा है। ऐसे में इन दिनों किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ी हुई है। हालांकि बीच-बीच में बूंदा-बांदी बारिश होने के चलते धान के पौधे को संजीवनी तो मिल रही है, लेकिन इतनी कम बारिश से धान का फसल तैयार होना बेहद मुश्किल जान पड़ता है। जुलाई के शुरूआती समय में अच्छी खासी बारिश होने के बाद किसानों ने खेतों में जैसे-तैसे कर धान की रोपनी तो कर दी, लेकिन अब जोरदार बारिश के इंतजार में किसान बैठे हैं। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो किसानों को धान के फसल से हाथ धोना पड़ जाएगा।

औसतन बारिश कम होने से किसान बेहाल

जानकारों की मानें धान की रोपनी का पिक ऑवर 15 जून से 15 जुलाई तक माना जाता है। ऐसे में जून माह के बाद अब जुलाई माह में भी अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है। 10 जून बीत रहा है मगर अबतक जिले में करीब 20 एमएम भी बारिश नहीं हो पाई है। आंकड़े बताते हैं कि मई माह में तो ठीक-ठाक हुआ लेकिन जून और जुलाई में अबतक काफी कम बारिश हुई है, इस कारण धान की रोपनी में किसानों के सांस फूल रहे हैं। जानकार बताते हैं कि मई माह में जिले में 106 एमएम बारिश की जरूरत थी, जिसमें 166.8 एमएम बारिश हुई है। इसके बाद जून माह में 302 एमएम बारिश के कारण 196.31 एमएम बारिश हो पायी है, जबकि जुलाई माह में 440 एमएम बारिश के जगह सात जुलाई तक 15.96 एमएम बारिश हो पायी है।

बोले किसान

किसान दिलीप यादव, अरविन्द यादव, सुरेश प्रसाद सिंह, अनमोल मेहता, विजय मेहता, दिनेश मंडल, हरदेव मल्लाह आदि ने बताते हैं कि धान की रोपनी का पिक ऑवर जा रहा है, लेकिन अबतक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपनी करने में काफी दिक्कतें आ रही है। धान रोपनी के पिक ऑवर में न तो नहरों से सिंचाई हो पा रही है और ना ही मूसलाधार बारिश हो रही है। ऊंचे इलाके के वैसे खेतों में जहां धान की रोपनी हो चुकी है, बारिश के अभाव में अब धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। एक सप्ताह में अगर मूसलाधार बारिश नहीं हुई तो धान की रोपनी में किसानों आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि धान के पौधे को न सिर्फ पानी बल्कि पानी वाला मौसम भी चाहिए, तभी धान का उत्पादन अच्छा होगा।

क्या कहते हैं अधिकारी

नव पदस्थापित जिला कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि जिले में आवश्यकता के अनुरूप कम बारिश जरूर हुई है, लेकिन किसान पंपसेट, बिजली मोटर आदि के माध्यम से सिंचाई कर धान की रोपनी कर रहे हैं। जिले में धान की रोपनी का रकवा बढ़ रहा है। जिले में अबतक लक्ष्य का करीब 20 फीसदी धान की रोपनी हो चुका है।

सामान्य प्रश्न

धान की रोपनी का पिक ऑवर कब माना जाता है?
धान की रोपनी का पिक ऑवर 15 जून से 15 जुलाई तक माना जाता है।

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