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1 मार्च, 2021|6:46|IST

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कोरोना की वैक्सीन का पता नहीं, दुनिया की आबादी से ज्यादा खुराक का करार

corona vaccine

कोरोना का टीका बाजार में अभी भले ही न आया हो लेकिन दिग्गज दवा कंपनियों ने वैक्सीन के इतने करार कर लिए हैं कि दुनिया की साढ़े सात अरब आबादी के टीकाकरण के लिए पर्याप्त है। मॉडर्ना, जीएसके, फाइजर, एस्ट्राजेनेका या रूस के गामेलया इंस्टीट्यूट ने सबसे बड़े करार किए हैं। 

ग्लोबल स्टैटहेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रत्याशित तौर पर छह माह से भी कम वक्त में सभी बड़ी कंपनियों के टीके की कामयाबी के दावे किए गए हैं। उनके परीक्षण अंतिम चरणों में हैं। मारामारी इस कदर है कि 33 करोड़ आबादी वाले अमेरिका ने ऑपरेशन वॉर्प स्पीड के तहत करीब दो अरब खुराक का करार पांच कंपनियों से कर लिया है। 6.5 करोड़ जनसंख्या वाला ब्रिटेन 25 करोड़ खुराक सुनिश्चित चुका है।आशंका है कि टीका बनते ही अमीर देश बड़ा हिस्सा हड़प कर जाएंगे। गरीब देशों को वैक्सीन पाने के लिए एक-दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

एस्ट्राजेनेका सबसे आगे
ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर में ढाई अरब खुराक के उत्पादन और बिक्री का करार कर लिया है। इसमें एक अरब खुराक का समझौता भारत के सीरम इंस्टीट्यूट से हुआ है। सीरम 40 करोड़ खुराक 2020 में ही उपलब्ध कराएगा। वह गरीब देशों और अमेरिका के लिए 30-30 करोड़ डोज देगी। लैटिन अमेरिका के सर्वाधिक प्रभावित ब्राजील और मैक्सिको के साथ बुधवार को करार के तहत एस्ट्राजेनेका उन्हें 15 करोड़ और 25 करोड़ खुराक देगी। मॉडर्ना अमेरिका को 60 करोड़ खुराक देगी, जिसमें पहली दस करोड़ खुराक के लिए डेढ़ अरब डॉलर का करार बुधवार को हुआ। 

वैक्सीन के बड़े करार-
देश-वैक्सीन-खुराक(संख्या)-प्राप्तकर्ता देश
मॉडर्ना- एमआरएनए 1273-एक अरब खुराक-अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ
एस्ट्राजेनेका-एजेडी-1222- ढाई अरब खुराक-अमेरिका, भारत, लैटिन अमेरिका, यूरोप, चीन
फाइजर व बायोनटेक-बीएनटी162बी2-75 करोड़- अमेरिका, जापान और ब्रिटेन
गामेलया रिसर्च(रूस)- स्पूतनिक वी- एक अरब खुराक-रूस व 20 अन्य देश
सिनोवैक-कोरोनावैक-एक अरब खुराक- चीन और अफ्रीकी देश
जॉनसन एंड जॉनसन-एडी26-40 करोड़ खुराक-अमेरिका
सनोफी व जीएसके-आरवैक्सीन-10 करोड़ खुराक-ब्रिटेन

02 अरब खुराक का करार सीपी और गावी अलायंस ने किया गरीब देशों के लिए


दस साल की जगह 12-18 माह में वैक्सीन का लक्ष्य
वैज्ञानिकों का कहना है कि अमूमन बीमारी के शोध, प्री क्लीनिकल, क्लीनिकल ट्रायल, मंजूरी, उत्पादन और वितरण में 10-12 साल लगते हैं, लेकिन कोविड-19 का टीका 12 से 18 माह तैयार करने की जद्दोजहद जारी है। 

टीके के पहले ही भारी मुनाफा कमाया
कोविड-19 वैक्सीन में कामयाबी वैश्विक कंपनी के लिए 50 से 70 अरब डॉलर का लाभ दे सकती है। मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका आदि के ट्रायल सफल होने के साथ ही शेयर छह से 26 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। कोरोना का एंटीबॉडी घोल बना रही अमेरिकी कंपनी रेजेनरॉन के शेयर तो फरवरी से 80 फीसदी उछल चुके हैं। मॉडर्ना का कारोबार जनवरी से तीन गुना बढ़कर 30 अरब डॉलर हो गया है। रिकॉर्ड उछाल के बाद शेयर बेचकर ही कंपनियां अरबों डॉलर कमा चुकी हैं।

दशकों लगे टीका बनाने में 
बीमारी-टीके का वक्त
चिकेनपॉक्स-28 साल
फ्लूमिस्ट-28 साल
रोटावायरस-15 साल
कोविड-19- 18 माह(अनुमान)

पहला टीका चेचक का बना था
28 साल की मेहनत के बाद ब्रिटिश वैज्ञानिक एडवर्ड जेनर ने 1796 में चेचक की वैक्सीन बनाई, जो दुनिया का पहला टीका था। उन्होंने मवेशियों में पाए जाने वाले वायरस काउपॉक्स (खुरपका) के जरिये यह टीका बनाया। लुई पाश्चर ने 1885 में रेबीज का टीका बनाया। 20वीं सदी की शुरुआत में ताबड़तोड़ टिटनेस, एंथ्रेक्स, कालरा, प्लेग, टायफाइड और टीबी के टीके बने।

असफलता भी मिली-----
कोरोना प्रजाति के वायरस सार्स 2002, मर्स 2012 में आया पर टीका नहीं बना
1976 से इबोला 24 बारकहर ढा चुका, 43 साल बाद 2019 दिसंबर में बना टीका 

टीके की अनुमानित कीमत----
मॉडर्ना – 50 से 60 डॉलर दो डोज ( 3700 से 4500 रुपये ) 
फाइजर - 6 से 8 डॉलर में दो डोज ( 420 से 560 रुपये ) 
फाइजर ( अमेरिका में ) – 39 डॉलर ( 2730 रुपये, दो डोज ) 
जॉनसन एंड जॉनसन – 10 डॉलर ( 750 रुपये ) 
गावी एलाएंस – 40 डॉलर ( 2800 रुपये ) – अमीर देशों के लिए 

भारत में सबसे सस्ता टीका------
225 रुपये के करीब होगी सीरम में बन रहे एस्ट्राजेनेका के टीके की कीमत
08 भारतीय कंपनियां भी टीका बनाने की होड़ में शामिल, विश्व में 165

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  • Web Title:covid19 vaccine latest updates: Corona vaccine is not known more than the world population dose agreement