पेचकस घोपने वाले दो दोषियों को परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश
पटियाला हाउस कोर्ट ने 13 वर्ष पुराने पेचकस घोपने के मामले में दो दोषियों को एक साल के लिए अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय बाद जेल भेजने से कोई सुधारात्मक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। प्रत्येक दोषी को पीड़ित को मुआवजा देना होगा।

नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने 13 वर्ष पुराने पेचकस घोपने के मामले में दो दोषियों को जेल भेजने के बजाय एक साल के लिए अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि वर्ष 2013 से मुकदमे, सुनवाई और अपील की प्रक्रिया झेल रहे दोषियों को इतने लंबे समय बाद जेल भेजने से कोई सार्थक या सुधारात्मक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
अभियोजन का विवरण
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने अमरीश ठाकुर उर्फ मिर्ची और योगेंद्र लाल उर्फ झुनझुन की अपील पर यह आदेश दिया। दोनों ने जुलाई 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से सुनाई गई छह महीने की साधारण जेल की सजा को चुनौती दी थी। दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 324 और 341 के तहत दोषी ठहराया गया था।
घटना का विवरण
अभियोजन के मुताबिक, 19 अक्तूबर 2013 को अमरीश और योगेंद्र ने सह-आरोपी राकेश के साथ मिलकर दीपक को रास्ते में रोका था। आरोप है कि उन्होंने पेचकस से दीपक की गर्दन और कंधे पर वार किया। इसके बाद सिर पर पत्थर से भी हमला किया गया था। अदालत ने आदेश में कहा कि परिवीक्षा अधिनियम का उद्देश्य दोषी को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उसे सुधार का अवसर देना है। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ित को साधारण चोटें आई थीं। दोनों दोषियों का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में उचित शर्तों के साथ परिवीक्षा का लाभ दिया जा सकता है। प्रत्येक दोषी को पीड़ित को दस हजार रुपये मुआवजे के रूप में देने होंगे। इसके अलावा दोनों को 15-15 हजार रुपये का बांड भरना होगा और एक साल तक शांति एवं अच्छे आचरण का पालन करना होगा।


