रिंग रोड घोटाले में जेल में बंद 17 आरोपियों की बेल खारिज
धनबाद के रिंग रोड घोटाले में जेल में बंद 17 आरोपियों की जमानत अर्जी बुधवार को अदालत द्वारा खारिज कर दी गई। मामले में लगभग 300 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है, जिसमें सरकारी अधिकारी और भू-माफियाओं ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। अधिकतर आरोपी पहले से जमानत से इनकार किए गए थे।

धनबाद, प्रतिनिधि। रिंग रोड घोटाला मामले में नौ जनवरी से जेल में बंद आरोपियों को अदालत से बुधवार को फिर राहत नहीं मिली। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की सुनवाई कर रही एससी-एसटी न्यायालय के विशेष न्यायाधीश मनीष की अदालत ने बुधवार को इस मामले में जेल में बंद 17 आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज की। आरोपी तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, तत्कालीन धनबाद सीओ व पूर्व जेपीएससी परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार, तत्कालीन अमीन सुशील प्रसाद, डीड राइटर अशोक कुमार महथा, बिचौलिया फर्जी खाताधारक उमेश महतो, रैयत बप्पी राय चौधरी, बिचौलिया अनिल कुमार सिन्हा, बिचौलिया रवींद्र कुमार, दिलीप गोप, तत्कालीन पैक्स प्रभारी रामकृपाल गोस्वामी, आलोक बरियार, तत्कालीन कानूनगो सुमेश्वर शर्मा, शंकर प्रसाद दुबे, काली प्रसाद सिंह, अनुपम कुमारी, कुमारी रत्नाकर की और से जमानत की अर्जी पर बहस की गई। अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इससे पूर्व भी आरोपियों की जमानत अर्जी निगरानी कोर्ट से खारिज की गई थी। आरोपियों की ओर से उच्च न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई गई थी, परंतु उच्च न्यायालय की ओर से मामले को निचली अदालत के एससी-एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा आरोपियों की ओर से जमानत की अर्जी लगाई गई थी。
300 करोड़ के गबन से जुड़ा है मामला:
पूरा मामला धनबाद के धोखरा, धनबाद, मनईटांड़ और दुहाटांड़ मौजा में रिंग रोड निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में करीब ₹300 करोड़ की हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि तत्कालीन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने भू-माफियाओं व बिचौलियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। आरोपियों ने फर्जी दलीलें और कागजात तैयार कर अशिक्षित, कमजोर तथा अनुसूचित जनजातिवर्ग के वास्तविक रैयतों के मुआवजे की राशि छलपूर्वक अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर कर गबन कर ली।


