कोर्ट बोला बच्चे की हत्या के बाद रति के जीवन में शून्यता पैदा की
जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरव की हत्या के मामले में सख्त टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि इस जघन्य अपराध ने रति के जीवन में शून्यता पैदा कर दी है। अभियुक्त विराज द्वारा किए गए अपराध ने न केवल रति और उनके पति को प्रभावित किया, बल्कि समाज पर भी गहरा असर डाला है।

डेढ़ साल के मासूम आरव की पटककर हत्या करने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने सख्त टिप्पणी की है। जिला जज ने फैसले में कहा है कि बच्चे की हत्या ने रति के जीवन में शून्यता पैदा कर दी है। केवल मासूम की हत्या नहीं की बल्कि आरोपी विराज ने बच्चे की मां रति और उसके पिता को भी प्रभावित किया है। रति न तो पति के साथ सामान्य जीवन जी सकती है और न अपने बच्चे के बिना जीवन जी पाएगी। रति और उसके पति के बीच पहले से ही विवाद चला आ रहा था। इस अपराध का प्रभाव रति और उसके पति के परिवार के साथ समाज पर पड़ा है। जिला जज डा. बब्बू सारंग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद सजा निर्धारित करने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विचार किया था। न्यायालय ने कहा कि इस अपराध की क्रूरता को किसी भी प्रकार कम करके नहीं आंका जा सकता। आरव की जिस प्रकार निर्ममता से हत्या की गई, उससे प्रत्यक्षदर्शी शिकोहाबाद के यादव कालोनी निवासी शकुंतला और दीपांश इतने भयभीत हो गए थे कि वे अभियुक्त को रोकने या पकड़ने का साहस भी नहीं कर सके।
अभियुक्त का परिवार पर प्रभाव
अभियुक्त विराज निवासी बदायूं ने एक निर्दोष डेढ़ वर्षीय बच्चे को क्रूरता से मार डाला। उसका उद्देश्य अपने भाई के परिवार को बर्बाद करना था। घटना के बाद बच्चे की मां का अपने निकट संबंधियों पर विश्वास समाप्त हो गया। यह अपराध समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर देने वाला है। ऐसा जघन्य अपराध किसी भी संवेदनशील समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। यदि ऐसे अपराधी को मृत्युदंड से कम सजा दी जाती है, तो यह न्याय के उद्देश्य के विपरीत होगा।
अभियुक्त की शिक्षा और समाज में स्वीकार्यता
न्यायालय ने उल्लेख किया कि अभियुक्त आठवीं कक्षा तक शिक्षित है, किराना दुकान चलाता है तथा उसने अपने जीवन का कोई विशेष उद्देश्य या सकारात्मक भविष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। समाज भी एक मासूम बच्चे के हत्यारे को सहज रूप से स्वीकार नहीं करेगा।
शासन और पारिवारिक विश्वास
देवर था तो बच्चे की रक्षा करता, हत्या नहीं
न्यायालय ने कहा कि अभियुक्त रति का देवर था। ऐसे में उसकी जिम्मेदारी बच्चे की रक्षा करने की थी, न कि उसकी हत्या करने की। इस घटना से समाज में यह संदेश जाएगा कि लोग अपने निकट संबंधियों पर भी विश्वास करने से डरेंगे। बचाव पक्ष ने स्वयं स्वीकार किया कि अभियुक्त और रति के बीच अच्छे संबंध थे, किंतु इस घटना ने पारिवारिक विश्वास की नींव ही हिला दी।


