बिना सुनवाई प्रोटेस्ट पिटीशन खारिज करने का आदेश निरस्त
विशेष अदालत ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट स्वीकार करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने सीजेएम बांदा को मामले की दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया है। वादी नत्थू प्रसाद ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत केस दर्ज कराया था। पहले की सुनवाई में वादी उपस्थित रहा था, लेकिन वकील अनुपस्थित थे।

बांदा। विशेष अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा स्थगन प्रार्थना पत्र पर विचार किए बिना और वादी को सुनवाई का अवसर दिए बिना पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) स्वीकार करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) बांदा को निर्देशित किया है कि वे कानून के दायरे में गुण-दोष के आधार पर इस मामले में दोबारा आदेश पारित करें। साथ ही निगरानीकर्ता को 20 जुलाई को संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश होने को कहा गया है। यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने कोतवाली नगर क्षेत्र के तिन्दवारा के नत्थू प्रसाद की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।
वादी नत्थू प्रसाद ने कोतवाली नगर थाने में धारा 328 और 306 आईपीसी के तहत अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर अदालत में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) दाखिल कर दी। रिपोर्ट के विरोध में नत्थू प्रसाद ने 27 जनवरी 2025 को कोर्ट में एक प्रोटेस्ट पिटीशन (आपत्ति) दाखिल की। सीजेएम न्यायालय ने 4 मई 2026 को यह कह आपत्ति को खारिज कर दिया कि पुकार पर कोई उपस्थित नहीं है और वकील अनुपस्थित हैं, इसलिए पुलिस की फाइनल रिपोर्ट मंजूर की जाती है। इस आदेश के खिलाफ वादी ने विशेष अदालत में रिवीजन दाखिल किया। विशेष अदालत ने मामले से जुड़ी पत्रावली का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि वादी कोर्ट की लगभग हर तारीख पर नियमित रूप से हाजिर होता रहा है। 4 मई 2026 को भी वादी कोर्ट में मौजूद था, लेकिन उसके अधिवक्ता दूसरी अदालत में व्यस्त होने के कारण बहस नहीं कर सके थे । इसके लिए वादी की ओर से कोर्ट में बकायदा एक स्थगन प्रार्थना पत्र भी पेश किया गया था।अदालत ने वादी की निगरानी याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायहित में दोबारा सुनवाई का आदेश जारी कर दिया है।


