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कोर्ट आखिरी रास्ता नहीं; बिना डरे अदालतों का दरवाजा खटखटाए जनता; बोले सीजेआई चंद्रचूड़

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि कोर्ट कोई आखिरी विकल्प नहीं है। यह लोक अदालत के तौर पर काम करता है और जनता को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में डरने की जरूरत नहीं है।

कोर्ट आखिरी रास्ता नहीं; बिना डरे अदालतों का दरवाजा खटखटाए जनता; बोले सीजेआई चंद्रचूड़
Ankit Ojhaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीMon, 27 Nov 2023 11:51 AM
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सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को संविधान दिवास समारोह के दौरान कहा कि देश की जनता को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से डरने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट लोक अदालत के तौर पर काम करता है और हर नागरिक को कोर्ट जाने का अधिकार है। इसे अंतिम विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, पिछले सात दशकों से सुप्रीम कोर्ट लोक अदालत के रूप में काम कर रहा है। लोग न्याय की आशा में ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। लोग साफ हवा और पानी पाने की इच्छा से भी सुप्रीम कोर्ट आते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान हर राजनीतिक विवाद को भी सुलझाने का अधिकार देता है। यहां आने वाला हर एक व्यक्ति इस बात की मिसाल है कि देश में संविधान का राज है।

सीजेआई ने कहा, नागरिक अपनी निजी स्वतंत्रता की सुरक्षा, मजदूरों के अधिकारों. आदिवासियों के अधिकारों, गैरकानूनी गिरफ्तारी और कई सामाजिक बुराइयों की रोकथाम के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं। अदालत की प्रतिबद्धता लोगों को न्याय देने की है तभी वे अदालत पर विश्वास करते हैं। उन्होंने जेल में भीड़ बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि जो ऐसी व्यवस्था की जा रही है जिससे जेल में कैदियों की संख्या कम हो और उनपर निगरानी भी की जा सके। उन्होंने कहा कि बीते साल संविधान दिवस पर राष्ट्रपति ने इसे हरी झंडी दी थी। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों को क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये सारे फैसले ई-एससीआर प्लैटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी में भी ई-एससीआर को लॉन्च कर दिया गया है। 21 हजार से ज्यादा फैसलों का हिंदी में अनुाद किया गया है। इसके अलावा पंजाबी, तमिल, गुजराती, बंगाली, मलयावम और अन्य भाषाओं में भी अनुवाद किया जा रहा है। सीजेआई ने कहा कि अदालतों में ई सेवा केंद्र शुरू किया जा रहा है जिससे कोई भी नागरिक न्याय तक पहुंचने में सक्षम हो। 

डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना पर सीजाआई ने कहा कि इस प्रतिमा का अदालत तक पहुंचने का अधिकार ही स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि हम स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाते हैं। वहीं संविधान दिवस मनाने के पीछे भी एक बड़ा इतिहास है। इसके पीछे उपनिवेशवाद से मुक्ति का इतिहास है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में सात फीट ऊंची पंचधातु की बनी बाबासाहेब की प्रतिमा का अनावरण किया गया है जिसमें व वकील की ड्रेस में हैं और एक हाथ में संविधान है। इसे मूर्तिकार नरेश कुमावत ने बनाया है। फिलहाल आइकॉनिक मदर इंडिया की प्रतिमा वहां से हटाई गई है।


 

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