धमाका पीड़ितों और आरोपी के अंतिम संस्कार की अनुमति
पटियाला हाउस कोर्ट ने लालकिले के पास नवंबर में हुए कार बम धमाके में मृत लोगों और आरोपी के जैविक अवशेषों के अंतिम संस्कार की अनुमति दी है। एनआईए को निर्देश दिया गया है कि सभी अवशेषों का निस्तारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किया जाए।

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। लालकिले के पास बीते साल नवंबर में हुए कार बम धमाके के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार को अहम आदेश दिया। कोर्ट ने धमाके में मृत लोगों और आरोपी के जैविक अवशेषों के अंतिम संस्कार की अनुमति दे दी है। विशेष न्यायाधीश पीतांबर दत्त की अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को निर्देश दिया कि धमाके में मारे गए 11 पीड़ितों और मुख्य आरोपी उमर उन नबी के जैविक अवशेषों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार या निस्तारण किया जाए। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि सभी जैविक अवशेषों का निस्तारण मृतकों की धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी गरिमा के साथ किया जाए। साथ ही एनआईए को इस प्रक्रिया के पालन की रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान एनआईए ने अदालत को बताया कि मृतकों और आत्मघाती हमलावर के शरीर के अंगों से जुड़े सभी आवश्यक फोरेंसिक साक्ष्य पहले ही एकत्र कर लिए गए हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि लंबे समय से रखे होने के कारण ये अवशेष सड़ने लगे हैं, इसलिए इनके निस्तारण की अनुमति मांगी गई थी.
चार्जशीट दाखिल
गौरतलब है कि 10 नवंबर को हुए बम धमाके ने राजधानी को झकझोर दिया था। इस मामले में एनआईए ने 14 मई को 7500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद पिछले महीने एजेंसी ने एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल की, जिसमें तीन और आरोपियों को शामिल किया गया। इन आरोपियों में एक फरार बाल रोग विशेषज्ञ भी शामिल है, जिसे आतंकी मॉड्यूल का संस्थापक सदस्य बताया गया है। इस तरह मामले में अब तक कुल 13 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। इनमें मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी का नाम भी शामिल है।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Nikhil Pathakशॉर्ट बायो: निखिल पाठक एक प्रतिबद्ध और तथ्यपरक पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट मीडिया में 6.5 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ में कार्यालय संवाददाता के रूप में कोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और स्पोर्ट्स बीट कवर कर रहे हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस न्याय, जवाबदेही और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहता है।
परिचय
निखिल पाठक नई दिल्ली में आधारित एक सक्रिय पत्रकार हैं, जो न्यायपालिका, पर्यावरणीय नियमन और खेल जगत से जुड़े विषयों पर गहन और संतुलित रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने 1984 सिख विरोधी दंगा मामलों के कोर्ट ट्रायल व सजा पर फैसले, जमीन के बदले नौकरी घोटाला, आईआरसीटीसी घोटाला और अदालतों के आंकड़ों पर आधारित कई प्रमुख खबरों की कवरेज की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशयों के संरक्षण और पर्यावरणीय जवाबदेही से जुड़े मामलों पर भी उनकी विस्तृत रिपोर्टिंग रही है।
करियर का सफर
निखिल पाठक ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2019 में अमर उजाला के साथ की। अमर उजाला की चंडीगढ़ यूनिट में वह डेस्क पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने खबरों के संपादन, पेज मेकिंग और डेस्क से जुड़े अन्य कार्यों की गहन समझ विकसित की। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने दैनिक जागरण में बतौर संवाददाता कार्यभार संभाला। दैनिक जागरण के पूर्वी दिल्ली कार्यालय में रहते हुए उन्होंने डीडीए, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, आरडब्ल्यूए और धर्म-कर्म जैसी बीटों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी मुद्दों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई रोचक और प्रभावी समाचार लिखे।फरवरी 2025 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ जॉइन किया। एचटी मीडिया के साथ उनका एक वर्ष का अनुभव है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
निखिल ने एमए (जर्नलिज्म) तथा बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) की पढ़ाई की है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और फील्ड अनुभव का संयोजन उन्हें कानूनी, पर्यावरणीय और खेल विषयों को तथ्यात्मक व सरल भाषा में प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।
रिपोर्टिंग विजन
निखिल का मानना है कि कोर्ट और एनजीटी से जुड़े फैसले केवल कानूनी दस्तावेज नहीं होते, बल्कि वे सीधे समाज, शासन और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी और पर्यावरणीय मुद्दों को पाठकों के लिए सरल, सटीक और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करना है।
विशेषज्ञता
कोर्ट रिपोर्टिंग (ट्रायल, सजा, महत्वपूर्ण आदेश)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)— प्रदूषण, भूजल दोहन, जलाशय संरक्षण
आंकड़ों पर आधारित न्यायिक रिपोर्टिंग
स्पोर्ट्स कवरेज
व्यक्तिगत रुचियां
संगीत, लेखन और बैडमिंटन


