दूसरे राज्य का निवासी होने के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता
गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी को जमानत राहत देते हुए एक महत्वपू

गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। अदालत ने साइबर ठगी के एक मामले में स्पष्ट किया कि केवल दूसरे राज्य का निवासी होने के आधार पर किसी आरोपी को जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही आरोपी की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने यह आदेश उत्तराखंड के जिला ऊधम सिंह नगर निवासी नीरज की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार महतो ने पुलिस को बताया था कि साइबर ठगों ने क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन सेवा बंद करने का झांसा दिया उनके क्रेडिट कार्ड से 1.70 लाख रुपये निकाल लिए।
जांच में सामने आया कि ठगी की राशि से अमेजन के ज़रिए सोना खरीदा गया। पुलिस ने मामले में विकास गौड़, संजय, सागर और नीरज सिरोला को गिरफ्तार किया। अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि नीरज पिता के जिम में ट्रेनर का काम करता है। वह इस ठगी में शामिल नहीं था। सह-आरोपी संजय जिम का सदस्य था, जिसने इस्तेमाल के लिए नीरज का मोबाइल मांगा। नीरज को उसकी आपराधिक गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। वहीं शिकायतकर्ता को उसकी पूरी राशि भी लौटाई जा चुकी है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने 10 हजार रुपये के लालच में अपना मोबाइल सह-आरोपी को दिया। चूंकि वह उत्तराखंड का रहने वाला है, इसलिए उसके फरार होने की आशंका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ मामला मुख्य रूप से केवल आशंकाओं पर आधारित है। उससे कोई प्रत्यक्ष राशि बरामद नहीं हुई है। अदालत ने यह कहते हुए आरोपी नीरज को जमानत दे दी कि महज किसी दूसरे राज्य का निवासी होने के आधार पर आरोपी को राहत देने से मना नहीं किया जा सकता।


