पीएफआई पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप तय
पटियाला हाउस कोर्ट ने पीएफआई संगठन और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ आतंकी साजिश मामले में आरोप तय किए हैं। सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है। एनआईए का कहना है कि पीएफआई युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित कर रहा था। अदालत ने 29 जुलाई से अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज करने का निर्देश दिया है।

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कथित आतंकी साजिश मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए संगठन और उसके 20 पदाधिकारियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा की अदालत ने शनिवार को औपचारिक रूप से आरोप तय करते हुए सभी आरोपियों को ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया। सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। इससे पहले पांच जून को अदालत ने पीएफआई और उसके 20 नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। इनमें संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर और चेयरमैन ओएमए सलाम शामिल हैं। इन पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने, आतंकी प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह सभी आरोप यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत हैं。
अभियोजन पक्ष के साक्ष्य 29 जुलाई से दर्ज होंगे
जांच एजेंसी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मुख्य आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र अदालत में दाखिल किए। एनआईए का आरोप है कि पीएफआई के नेता युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित कर रहे थे, समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ा रहे थे और कुछ प्रमुख आरएसएस नेताओं को निशाना बनाने की योजना भी बना रहे थे। अदालत ने अब मामले को ट्रायल के लिए सूचीबद्ध कर दिया है और 29 जुलाई से अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जाएंगे।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर दर्ज हुआ था मामला
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया यह गंभीर आशंका बनती है कि आरोपी, पीएफआई और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद भारत की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने और देश में शरीय कानून स्थापित करने की योजना बना रहे थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने यह मामला 13 अप्रैल 2022 को गृह मंत्रालय के निर्देश पर दर्ज किया था।


