साक्ष्य के अभाव में अपहरण कर हत्या के आरोप से बरी
बस्ती में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपहरण और हत्या के आठ साल पुराने मामले में इंद्रजीत चौधरी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। आरोपित की मृतक से कोई दुश्मनी नहीं होने और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के कारण अदालत ने सबूतों की कमी पर यह निर्णय लिया।

बस्ती, निज संवाददाता। जिला एवं सत्र न्यायाधीश शमसुल हक की अदालत ने अपहरण कर हत्या करने के आठ साल पुराने मामले में घटना की कड़ी दर कड़ी मेल नहीं खाने व साक्ष्य की कड़िया नहीं जुड़ने पर आरोपी इंद्रजीत चौधरी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया है। लालगंज थानाक्षेत्र के बोकनार गांव निवासी बलराम उपाध्याय ने 26 अक्तूबर 2018 को अपने छोटे भाई वीरेंद्र उपाध्याय के गायब होने की सूचना लालगंज थाना में दर्ज कराया था। पहली नवंबर 2018 को समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ कि पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के कड़र गांव में एक लाश मिली है। वह पहचान में नहीं आ रही थी।
पुलिस से बरामद कपड़ों तथा लाश के जनेऊ में लगी चाबी से वीरेंद्र कुमार उपाध्याय के कमरे का ताला खुलने पर घरवालों को विश्वास हो गया कि यह वीरेंद्र उपाध्याय की ही लाश है। पुलिस ने दौरान विवेचना इंद्रजीत चौधरी निवासी ग्राम गौरा उपाध्यक्ष थाना लालगंज जिला बस्ती को आरोपित करते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।अभियोजन की तरफ से गवाह व अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने अदालत में कहा कि आरोपित की मृतक से कोई दुश्मनी नहीं थी। मृतक के परिवार वालों ने दो लाख उधार आरोपित के परिवार से लिया था। उसके बदले में वह एक बीघा जमीन आरोपित के परिवार वालों को लिखने के लिए तैयार थे। तो हत्या का कोई कारण नहीं था। गवाहों के बयानों में घोर विरोधाभास है। एफआईआर में कोई आशय नहीं दर्शाया है केवल आशंका जताया है। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत कहा कि परिस्थितजन्य साक्ष्य के मामले में साक्ष्य की कड़ियां आपस में एक दूसरे से जुड़नी चाहिए, जबकि प्रस्तुत मामले में ऐसा नहीं है। न्यायाधीय ने आरोपित इंद्रजीत को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।


