सीसीटीवी फुटेज ने 14 साल बाद आरोपियों को इंसाफ दिलाया
कड़कड़डूमा कोर्ट ने ईएसआईसी के 14 साल पुराने मुकदमे में भाटिया एसिड प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक हरिंदर भाटिया को बरी कर दिया। सीसीटीवी फुटेज ने न्यायालय में यह साबित किया कि ईएसआई निरीक्षक कंपनी में करीब साढ़े चार घंटे तक रहे, जिससे विभाग के आरोप संदिग्ध हो गए।

नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा कोर्ट ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के 14 साल पुराने एक मुकदमे में फैसला सुनाते हुए भाटिया एसिड प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक हरिंदर भाटिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस लंबे कानूनी विवाद का रुख केवल एक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य यानी सीसीटीवी फुटेज के सामने आने से पूरी तरह पलट गया। इसी फुटेज ने इंसाफ दिलाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुकृति झा की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। ईएसआईसी ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने मई 2007 से अगस्त 2010 की अवधि के दौरान कर्मचारियों की हाजिरी, वेतन रजिस्टर और खाता-बही जैसे वैधानिक दस्तावेज जांच के लिए अधिकारियों को नहीं दिखाए थे।
17, 23 और 30 मई 2012 को अधिकारियों ने कंपनी का दौरा किया, लेकिन रिकॉर्ड नहीं मिलने का दावा किया गया। इसके बाद विभाग ने वर्ष 2012 में ईएसआई कानून की धारा 85(जी) के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान ईएसआई के निरीक्षकों ने अदालत में बयान दिया कि जब किसी प्रतिष्ठान में दस्तावेज नहीं दिखाए जाते, तो उनका निरीक्षण दौरा 15 से 30 मिनट में ही खत्म हो जाता है।हालांकि, बचाव पक्ष द्वारा अदालत के समक्ष पेश की गई 30 मई 2012 की सीसीटीवी फुटेज ने विभागीय दावों की पोल खोल दी। सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट हुआ कि ईएसआई निरीक्षक दोपहर लगभग डेढ़ बजे कंपनी परिसर में दाखिल हुए थे और शाम को करीब पौने छह बजे बाहर निकले। अधिकारियों की इस साढ़े चार घंटे से अधिक लंबी मौजूदगी ने विभाग के आरोपों को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया।


