अफीम की खेती व कारोबार मामले में 27 लोग रिहा
गिरिडीह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 27 अभियुक्तों को अवैध रूप से अफीम की फसल उगाने के मामले में रिहा किया है। अभियोजन पक्ष द्वारा पर्याप्त साक्ष्य न पेश करने के कारण यह निर्णय लिया गया। मामले में 28 अभियुक्त थे, जिनमें से एक का निधन हो गया था। कोर्ट के फैसले को बचाव पक्ष ने न्याय की जीत बताया।

गिरिडीह। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह विशेष न्यायाधीश कंवलजीत चोपड़ा की अदालत ने लोकाय नयनपुर थाना क्षेत्र के थानसिंहडीह गांव में जमीन पर अवैध रूप से अफीम की फसल उगाकर कारोबार करने के एक मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए 27 अभियुक्तों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया है। इस मामले में कुल 28 अभियुक्त थे। हालांकि एक अभियुक्त नारायण सिंह का 08 जुलाई 2019 को ही निधन हो गया था। इस वजह से मामले में शेष बचे 27 अभियुक्तों पर ट्रायल चला और उसके बाद अदालत का फैसला आया है। अदालत ने मामले के प्राथमिकी अभियुक्त शंकर साव, बहादुर यादव, रामा मोदी उर्फ रामजी मोदी, मुन्ना यादव, सीताराम यादव, विदेशी यादव, केशो यादव, सुखदेव यादव, सतन यादव, खुशी यादव, रामू यादव, लालो सिंह उर्फ लालो यादव, होरिल यादव, चमरू यादव, बुलक यादव, आशो यादव, कारू यादव, अर्जुन यादव, कैलू यादव, मदन यादव, लीलो सिंह उर्फ डीलो सिंह, मोहन यादव, मदन यादव, राजकुमार यादव, सुखदेव यादव, भुनेश्वर यादव एवं अर्जुन यादव को रिहा किया है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मयंक ने इसे न्याय की जीत कहा है। रिहा होने वाले कई अभियुक्त ऐसे थे जिनकी उम्र लगभग 80 साल हैं। उन सभी का कोर्ट का फैसला आने के बाद चेहरे में खुशी देखी गयी।
क्या है मामला
यह मामला लोकायनयनपुर थाना कांड संख्या 2/2010 से संबंधित है। इस मामले की प्राथमिकी पुलिस अवर निरीक्षक आरके शाह के बयान पर 14 फरवरी 2010 को दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में आरोपियों पर अपनी जमीन पर अवैध रूप से अफीम की फसल उगाने एवं अफीम का कारोबार करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने मौके से 08 किलो अफीम भी जब्त किया था।
अदालत में हुई जोरदार बहस
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से चार साक्षी के गवाह हुए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता महीप ने कुछ तकनीकी सवाल उठाते हुए अदालत से कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष जिन मादक पदार्थों को जब्त करने का दावा किया उसे प्रमाणिक तरीके से सिद्ध नहीं कर पाया। साथ ही इस मामले में अन्य कई चीज पाई गई जो अभियोजन पक्ष पर गंभीर संदेह उत्पन्न करता है। बचाव पक्ष में कहा कि भोले भाले ग्रामीणों के लिए यह एक गंभीर मसला है कि पिछले 16 वर्षों से वह अदालत की कार्रवाई में भाग दौड़ कर रहे हैं। अभियोजन को इस मामले में जो तत्परता और कार्रवाई करनी चाहिए वह नहीं कर पाए। सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त की मौत भी हो गई। दूसरी और अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक अशोक दास ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और मादक पदार्थ के कारण समाज पर बहुत कुप्रभाव पड़ रहा है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्तों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्षी से संदेह उत्पन्न होता है। जिसका लाभ अभियुक्तों को दिया जा रहा है。


