सेना के व्हाट्सऐप ग्रुप हैक करने की थी साजिश
पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में दंपति मोहम्मद साहिल और समीरा को गिरफ्तार किया है। पुलिस को गेमिंग ऐप और क्रिप्टोकरेंसी में फंडिंग का शक है, जबकि दंपति के लोकल नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। फॉरेंसिक जांच से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार दंपति मोहम्मद साहिल और समीरा से पूछताछ के बाद पुलिस अलग-अलग एंगल पर जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, उसे कई बड़ी साजिश के सुराग मिले हैं। इनकी पुष्टि की जा रही है। पुलिस को इस मामले में गेमिंग ऐप के जरिये और क्रिप्टोकरेंसी में फंडिंग होने का शक है। पुलिस को यह भी पता चला है कि आईएसआई के एजेंट ई-सिम के जरिये भारतीय वायुसेना के व्हाट्सऐप ग्रुप को हैक करने की साजिश भी रच रहे थे। इन जानकारियों के सामने आने के बाद पुलिस दंपति के मोबाइल फोन समेत अन्य डिवाइस की फॉरेंसिक जांच करा रही है। दरअसल, भारतीय एजेंसियों से बचने के लिए आईएसआई पारंपरिक तरीकों की बजाय आधुनिक डिजिटल हथियारों जैसे ‘गेमिंग ऐप्स’ का इस्तेमाल करने लगा है। ताकि पेमेंट के तरीकों के आधार पर संदिग्धों तक एजेंसियां न पहुंच सकें।
वर्तमान में खुफिया एजेंसियां
मुख्य वित्तीय लेनदेन को छिपाने के लिए मल्टीप्लेयर ऑनलाइन गेम्स के इन-ऐप परचेज, क्रिप्टो-टोकन या डार्क वेब पर डिजिटल वॉलेट्स का सहारा ले रही हैं। गिरफ्तार दंपति के पास लेन-देन का सीमित रूट ही नजर आ रहा है, इसलिए पुलिस को इस डिजिटल तरीके से पेमेंट का शक है। इस कारण पुलिस इस दंपति के फोन की फोरेंसिक जांच के जरिये ऐसे ‘हिडन ऐप्स’ या एन्क्रिप्टेड चैट रूम्स (जैसे टेलीग्राम या सिग्नल के सीक्रेट चैट्स) का पता लगाने में जुटी है।
दंपति से जुड़े लोकल नेटवर्क की जांच
विदेशी खुफिया एजेंसियां अब सीधे सीमा पार से घुसपैठ कराने के बजाय भारत के भीतर ही ‘लोकल मॉड्यूल’ तैयार कर रही हैं। इसलिए साहिल व समीरा के लोकल नेटवर्क की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-कौन से और कहां-कहां के लोग इनके नेटवर्क से जुड़े थे। माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस द्वारा तकनीकी जांच के लिए भेजी गई डिवाइस की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


