निर्माण सेस देने में सरकारी विभाग ही डिफॉल्टर
कानपुर में श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं का पैसा सरकारी विभाग डकार रहे हैं। निर्माण अधिभार की समीक्षा में यह सामने आया कि कई विभाग कार्यदायी संस्था से सेस काटते हैं लेकिन श्रम विभाग को जमा नहीं कराते। अपर श्रमायुक्त ने सेस जमा करने का आग्रह किया है।

कानपुर, प्रमुख संवाददाता। श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं का पैसा सरकारी विभाग ही डकार कर बैठे हैं। निर्माण अधिभार (सेस) की समीक्षा बैठक में विभागों की पोल खुलकर सामने आ गई। पता चला कि तमाम विभाग निर्माण सेस की रकम कार्यदायी संस्था से काट तो रहे हैं, लेकिन श्रम विभाग के कोष में वर्षों से जमा नहीं कर रहे हैं। फिलहाल, अपर श्रमायुक्त ने विभागों से सेस जमा करने का आग्रह किया है। श्रम विभाग निर्माण मजदूरों के लिए एक दर्जन से अधिक कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करता है, जिसमें मजदूरों की बेटियों की शादी से लेकर, बच्चों की पढ़ाई व उच्च शिक्षा के लिए अनुदान देता है। अनुदान का बजट निर्माण सेस से जमा होता है। इस साल कानपुर को सेस वसूली का 85 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला हुआ है। इस क्रम में गुरुवार को समीक्षा बैठक हुई, तो चौंकाने वाले कारनामे सामने आए।
जिला पंचायत ने सेस के नाम पर नहीं दी फूटी कौड़ी
जिला पंचायत नक्शों की स्वीकृत हर साल बड़े पैमाने पर करता है। अनुमति जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी देते हैं। हैरानी की की बात है कि जिला पंचायत ने सेस की व्यवस्था लागू होने के समय से फूटी कौड़ी भी श्रम विभाग में जमा नहीं कराया है। समाज कल्याण विभाग का भी करीब तीन करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा जल निगम, प्रोबेशन विभाग, आवास विकास समेत कई विभाग भी सेस जमा नहीं कर रहे हैं। हालांकि, नगर निगम और केडीए सेस की रकम नियमित जमा कराता है।
कोट
निर्माण सेस को लेकर विभागों के साथ बैठक की गई। जिला पंचायत से एक भी रुपया सेस कभी नहीं मिला है। यह चौंकाने वाली बात रही। विभागों से अपेक्षा की गई है कि सेस की रकम को जमा कराने की प्रक्रिया में तेजी लाएंगे।
- शमीम अख्तर, अपर श्रमायुक्त कानपुर परिक्षेत्र


