मनरेगा योजना में धांधली का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
हिसुआ प्रखंड के चितरघट्टी पंचायत में मनरेगा योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने अधिकारियों पर फर्जी ढंग से योजनाओं का संचालन करने और अवैध वसूली का आरोप लगाया है। उन्होंने बिहार सरकार को लिखित शिकायत की है और मांग की है कि योजनाओं की स्थल जांच कराई जाए।

हिसुआ प्रखंड अंतर्गत चितरघट्टी पंचायत में मनरेगा योजनाओं के संचालन में व्यापक भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की शिकायत दर्ज करायी गयी है। स्थानीय ग्रामीणों ने हिसुआ के कार्यक्रम पदाधिकारी शशिकान्त शास्त्री पर अवैध वसूली यानी कमीशन लेकर फर्जी तरीके से योजनाओं का संचालन करने और भुगतानों को हरी झंडी देने का गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायत और आरोप
स्थानीय ग्रामीणों राहुल कुमार, निवास कुमार, सुबोध कुमार, निकेश कुमार, चुन्नू कुमार आदि ने नवादा जिलाधिकारी तथा ग्रामीण विकास विभाग, पटना के प्रधान सचिव को लिखित आवेदन व बिहार सरकार के सहयोग पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि पंचायत के ग्राम मौलानागर में मुख्य सड़क से सटे अहर में मिट्टी कटाई कार्य समेत कई अन्य योजनाओं में बिना जमीनी काम कराए फर्जी मास्टर रोल तैयार किया गया। बरसात के मौसम में जब अहर-पैन में पानी भरा हुआ है, तब भी कागजों पर मजदूरों की फर्जी ऑनलाइन हाजिरी बनाकर लाखों रुपये का अवैध भुगतान किया जा रहा है।
अधिकारी की भूमिका
आरोप यह भी है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा बिना किसी निष्पक्ष जांच के योजना का भुगतान 15 अगस्त को स्वीकृत कर दिया गया। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो अधिकारी द्वारा कथित तौर पर मनमानी भरे लहजे में कार्रवाई से इनकार कर दिया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच स्वीकृत व भुगतान की गई सभी मनरेगा योजनाओं की स्थल जांच कराई जाए, अवैध भुगतानों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए। (नवादा/हिसुआ से राजेश मंझवेकर/उदय कुमार सिन्हा)


