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6 जुलाई, 2020|4:45|IST

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WHO सिर्फ बानगी, कोरोना संकट के बाद बदलेंगे दुनिया के समीकरण, भारत रणनीतिक लिहाज से अमेरिका के करीब

world health organization   photo by ap

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से रिश्ते खत्म करने के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ऐलान के बाद इस वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। इसका असर अन्य वैश्विक संस्थाओं में भी देखने को मिल सकता है। जानकारों का कहना है कि ये खींचतान केवल अमेरिका और चीन के बीच सीमित नही रहेगी, बल्कि दुनिया के कई बड़े देश इसमें शमिल हो सकते हैं।

अमेरिका की अनदेखी मुमकिन नहीं
दुनिया के सौ से ज्यादा देश डब्ल्यूएचओ की भूमिका और कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच के मुद्दे पर एक साथ आए थे। चीन पूरे मामले में अलग थलग पड़ा था। जानकार मानते हैं कि अमेरिका के ताजा ऐलान के बाद भी डब्ल्यूएचओ में उसका समान विचारधारा वाले और सहयोगी देशों से तालमेल बना रहेगा। डब्ल्यूएचओ के फैसलों और विचार विमर्श में अमेरिका की अनदेखी कर पाना मुमकिन नहीं होगा।

अमेरिका के करीब भारत
सूत्रों ने कहा भारत सीधे तौर पर किसी पक्ष में शामिल नहीं होगा, लेकिन बीते दिनों के घटनाक्रम से स्पष्ट है कि वह खुद भी डब्ल्यूएचओ की भूमिका से संतुष्ट नहीं है। भारत कई मुद्दों पर अमेरिका के ज्यादा करीब नजर आया। जानकार इसकी वजह भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को मानते हैं।

सहयोगी देशों के साथ बढ़ेगी भारत की भूमिका
वैश्विक मंचों पर चीन हमेशा भारत के हितों में रोड़ा खड़ा करता रहा है। जहां भी भारत की भूमिका प्रभावी हो सकती है उन जगहों पर चीन की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अड़ंगेबाजी जरूर नजर आती है। जानकार मानते हैं कि भारत की अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान के अलावा उन यूरोपीय देशों से विश्व संस्थाओं में समझ प्रगाढ़ होगी जो भारत के हितों के साथ खड़े होते रहे हैं।

चीन से कई मुद्दों पर विरोध
सूत्रों ने कहा कि व्यापारिक, आर्थिक मजबूरी और पड़ोसी होने के नाते भौगोलिक अपरिहार्यता चीन और भारत के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर सीधे बात की वजह है। लेकिन अन्य रणनीतिक मुद्दों पर भारत से उसका स्वाभाविक विरोध भी है। सीमा विवाद के साथ दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत चीन से अलग राय रखता है। ताइवान और हांगकांग पर भी भारत का रुख चीन से मेल नही खाता।

भारत अंदर रहकर निभाए भूमिका
भारत को डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिल चुकी है। जानकार मानते हैं कि डब्ल्यूएचओ के भीतर रहकर भारत को इस संस्थान को पारदर्शी और ज्यादा विश्वसनीय बनाने में अपनी प्रभावी भूमिका अदा करनी चाहिए। इस मुहिम में उसे तमाम देशों का साथ मिलना तय है।

संयुक्त राष्ट्र में भी नजर आएगा टकराव
सूत्रों का कहना है कि कोविड संकट का असर आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भी देखने को मिलेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में हांगकांग के मुद्दे पर अमेरिका और ब्रिटेन का चीन से टकराव शुरू हो चुका है। इसे कोरोना संक्रमण के बाद अमेरिका चीन रिश्तों में आए तनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले कुछ महीनों में वैश्विक मंचों पर काफी कुछ समीकरण बदले हुए नजर आएंगे। डब्ल्यूएचओ का टकराव इसकी शुरुआत भर है।

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