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हिंदी न्यूज़ देशकोरोना की तीसरी लहर में जान गंवाने वाले 60 फीसदी मरीजों ने नहीं ली वैक्सीन, सर्वे में दावा

कोरोना की तीसरी लहर में जान गंवाने वाले 60 फीसदी मरीजों ने नहीं ली वैक्सीन, सर्वे में दावा

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इस समय कोरोना की तीसरी लहर चल रही है, हालांकि यह सही है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद पहली और दूसरी लहर की अपेक्षा तीसरी लहर कम खतरनाक साबित हुई है, लेकिन फिर भी इसे हल्के...

कोरोना की तीसरी लहर में जान गंवाने वाले 60 फीसदी मरीजों ने नहीं ली वैक्सीन, सर्वे में दावा
Gauravलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSun, 23 Jan 2022 11:16 AM

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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इस समय कोरोना की तीसरी लहर चल रही है, हालांकि यह सही है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद पहली और दूसरी लहर की अपेक्षा तीसरी लहर कम खतरनाक साबित हुई है, लेकिन फिर भी इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसी बीच मैक्स हेल्थकेयर द्वारा किए गए एक सर्वे में कई आकंड़े सामने निकलकर आए हैं। इसमें बताया गया है कि मौजूदा कोरोना लहर पहली और दूसरी लहर से किस प्रकार अलग है।

दरसअल, मैक्स हेल्थकेयर ने अपने अध्ययन के आधार पर कहा है कि पिछले साल अप्रैल से मई के दौरान कोरोना संक्रमित चार में से तीन व्यक्ति को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी। पहली लहर के दौरान जितने लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, उनमें से 63 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया था जबकि पिछले साल दूसरी लहर के दौरान 74 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी।

इतना ही नहीं पहली और दूसरी लहर से तुलना करें तो इस बार सिर्फ 23.4 प्रतिशत मरीजों को ही ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही है। मौजूदा लहर में कोरोना से मरने वालों में 60 प्रतिशत लोगों ने या तो सिंगल डोज लिया था या फिर वे अनवैक्सीनेटेड थे। मृतकों में ज्यादातर की आयु 70 साल से ज्यादा थी और उनमें से कई डायबिटीज, कैंसर, किडनी या दिल से जुड़ी बीमारियों का शिकार थे।

मैक्स हेल्थकेयर के समूह चिकित्सा निदेशक संदीप बुद्धिराजा ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि अध्ययन से दो महत्वपूर्ण बिंदु देखे गए हैं। एक यह है कि इस लहर के दौरान अस्पताल में कुल एंट्री बहुत कम रही है। दूसरा बिंदु यह है कि दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में भर्ती हुए कुल मरीजों में से लगभग 70 से 80 प्रतिशत को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता थी। जबकि इस लहर में कुल भर्ती में से केवल 20 से 30 प्रतिशत को ही ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता हुई।

यह अलग बात है कि इस बार भी संक्रमित लोगों की संख्या उतनी ही है लेकिन अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या पहली और दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम है। दिल्ली में दूसरी और तीसरी लहर के दौरान लगभग 28 हजार मामले रोजाना आए। अगर इस लिहाज से देखें तो अस्पतालों में दूसरी लहर के दौरान यानी पिछले साल 2000 मरीज रोजाना आए जबकि इस बार सिर्फ 415 मरीजों की भर्ती अस्पतालों में हुई।

कोरोना की पहली लहर में मृत्यु दर का आंकड़ा 7.2 फीसदी रहा जो कि दूसरी लहर में बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो गया। जबकि मौजूदा लहर में यह आंकड़ा 6 फीसदी दर्ज किया गया है। कोरोना वैक्सीनेशन होने के कारण मौत के आंकड़ों में कमी आई है।

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