DA Image
26 सितम्बर, 2020|1:05|IST

अगली स्टोरी

कोरोना से रिकर हो चुके लोगों की नहीं खत्म हुई चिंता, ठीक होने के 3 महीने बाद खत्म हो सकता है एंटीबॉडी

coronavirus rapid antibody test kits   ani

1 / 2Coronavirus Rapid Antibody Test Kits. (ANI)

corona rapid antibody test kit

2 / 2corona rapid antibody test kit

PreviousNext

कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी कुछ लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडी नजर नहीं आ रहे हैं। अगस्त में हुए सिरो सर्वे के मुताबिक, 30 फीसदी ठीक होने वाले लोगों में एंटीबॉडी नहीं मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल ही में कोरोना वायरस संक्रमण के दोबारा होने के कई मामले सामने आए हैं, ऐसे में कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

प्लाज्मा देने गए तो पता चला
एम्स में कोरोना संक्रमण से पीड़ित एक नर्सिंग अधिकारी जुलाई के अंतिम सप्ताह में संक्रमित हुए थे और 12 दिन बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। ठीक होने के 22 दिन बाद वह एम्स के ब्लड बैंक में प्लाज्मा दान करने के लिए गए तो शरीर में एंटीबॉडी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिले। इसलिए उनका प्लाज्मा भी नहीं लिया गया। इससे पहले एक तकनीशियन का भी प्लाज्मा इसकी कारण से नहीं लिया गया।

विशेषज्ञों की राय

एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर नवल किशोर विक्रम ने बताया कि कोरोना से ठीक होने वाले सभी लोगों के शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं मिलते हैं। यह हर व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। कुछ का शरीर इस तरह से प्रतिक्रिया करता है कि उनके शरीर में ठीक होने के बाद एंटीबॉडी पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते या एंटीबॉडी 50 से 60 दिन में ही आधे होने लगते हैं। अब तक एंटीबॉडी बनने यानी शरीर में कोरोना के खिलाफ कब तक लड़ने की क्षमता विकसित हुई इस पर कई शोध हुए हैं। कुछ शोध के मुताबिक 70 से 90 दिनों तक शरीर में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी बचे रह सकते हैं।

दोबारा संक्रमण पर अलग-अलग राय
दोबारा संक्रमण पर डॉक्टरों की अलग अलग राय है। गंगाराम के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर अतुल कक्कड़ के मुताबिक, पर्याप्त एंटीबॉडी न होने पर दोबारा संक्रमण हो सकता है, जबकि एम्स के प्रोफेसर नवल विक्रम के मुताबिक इस पर अभी और शोध होना बाकी है। उन्होंने कहा कि हांगकांग में तो दोबारा संक्रमण के मामले मिले हैं, लेकिन भारत में जो मामले मिले हैं, संभव है कि उन मरीजों में डेड कोरोना वायरस मिला हो। उन्होंने कहा कि अभी बड़े अध्ययन के नतीजे के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

सांस और थकान की समस्या वाले आ रहे

कोरोना से ठीक हुए लोगों के लिए दिल्ली के राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में पोस्ट कोविड क्लीनिक शुरू किया गया है। यहां कोरोना से ठीक होने वाले ऐसे लोगों का इलाज किया जा रहा है, जिनमें वायरस तो निष्क्रिय हो गया है, लेकिन लक्षण अब भी बने हुए हैं। राजीव गांधी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बीएल शेरवाल के मुताबिक, अभी तक 200 से अधिक ऐसे लोगों को अस्पताल में परामर्श दिया गया है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जिन्हें कोरोना से ठीक होने के बाद भी सांस लेने में तकलीफ और बदन दर्द की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ लोगों में ठीक होने के डेढ़ महीने बाद भी सूंघने की क्षमता वापस नहीं आई है।

क्या इलाज हो रहा है
डॉक्टर शेरवाल ने बताया कि कोरोना के लिए कोई भी दवा अभी नहीं आई है। हम लोगों के लक्षणों के आधार पर इलाज कर रहे हैं। पोस्ट कोविड क्लीनिक में आने वाले लोगों को भी लक्षणों के आधार पर इलाज दिया जा रहा है। सांस की तकलीफ वाले मरीजों को उनके लक्षणों की गंभीरता के आधार पर दवाएं दी जा रही हैं। लोगों को ठीक होने का बाद भी विटामिन सी युक्त भोजन और विटामिन डी के लिए धूप सेंकने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा लोगों को हल्का व्यायाम करने के लिए भी कहा जा रहा है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Coronavirus in India Latest updates Antibodies may end after three months of recovery