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13 जुलाई, 2020|11:49|IST

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कोरोना संकट: खाड़ी युद्ध के वक्त से अधिक लोग वापस आने को इच्छुक

क्या खाड़ी युद्ध के वक्त से ज्यादा संख्या में लोग कोरोना संकट के दौरान स्वदेश वापसी करने वाले हैं? खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय मिशन में जिस तरह से लोगों ने पंजीकरण कराया है, उसे देखते हुए भारत सरकार के सामने उन्हें वापस लाने की चुनौती बढ़ गई है। सरकार चरणबद्ध तरीके से राज्यों की क्षमता और सहमति के आधार पर लोगों को वापस लाना चाहती है। यूएई में भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि फिलहाल उन लोगों को भारत भेजा जाएगा, जिन्हें तत्काल वापसी की जरूरत है।

वापसी के तहत सात से 13 मई की अवधि में आने वालों में करीब साढ़े चार हजार लोग खाड़ी देशों से हो सकते हैं। दो विशेष फ्लाइट सीधे यूएई से केरल भी जा सकती है। समुद्री मार्ग से भी कुछ देशों से लोगों को लाया जाएगा। इसके लिए शिप भेजे गए हैं।

सूत्रों के अनुसार सरकार बड़ी वापसी योजना के लिए राज्यों से वार्ता के आधार पर तैयार है लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को नहीं लाया जा सकता। पूरी प्रक्रिया में वक्त लगेगा। खाड़ी युद्ध के वक्त करीब एक लाख 70 हजार लोगों को वापस लाया गया था। दुबई स्थित भारतीय कॉन्सुलेट ने जानकारी दी है कि यूएई से आने के लिए दो लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। अन्य खाड़ी देशों को मिला तीन लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। कॉन्सुलेट कार्यालय ने कहा है कि एक साथ इतने लोगों को विमानों के जरिये लाना संभव नहीं है। चरणबद्ध तरीके से वापसी सुनिश्चित होगी। इसमें वक्त लगेगा।

जटिल स्थिति से सामना : जानकारों का कहना है कि खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय के लिए बहुत ही जटिल स्थिति पैदा हो गई है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत आदि देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक बेरोजगार हुए हैं।

राज्यों पर दबाव बढ़ेगा : सूत्रों ने कहा भारत वापस लाने पर सरकारों को एक अलग योजना पर भी काम करना पड़ेगा। सभी को काम उपलब्ध कराना, सामाजिक सुरक्षा राज्यों पर अतिरिक्त भार बढ़ाएगा। योजना उन्हें बनानी होगी।

पैसे भेजने वालों की होगी कमी: सूत्रों ने कहा अगर संकट बढ़ता है तो भारत पर इसका असर आर्थिक रूप से भी पड़ेगा। भारतीयों ने पिछले साल 83 अरब डॉलर की धनराशि भारत भेजी थी।

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  • Web Title:Corona Crisis: More people willing to return than at the time of Gulf War