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27 जनवरी, 2020|5:52|IST

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जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जावड़ेकर ने विकसित देशों पर साधा निशाना, बोले- वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं

prakash javadekar

कॉप-25 जलवायु वार्ता में भारत ने विकसित देशों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे इस खतरे से निपटने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि विकसित देश एक खरब डॉलर के हरित कोष समेत अपने सभी लक्ष्यों को पूरा करें।जावड़ेकर ने मंगलवार को उच्च स्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए भारत के हितों से जुड़े पांच मुद्दों को उठाया, जिनमें विकसित देश रोड़ा बने हुए हैं। 

उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने क्योटो प्रोटोकॉल के लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं। अब एक साल बाद पेरिस समझौता शुरू हो जाएगा। ऐसे में विकसित देशों को तीन साल का समय देकर उन्हें क्योटो के लक्ष्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाए। इसके तहत उत्सर्जन में 25-40 फीसदी तक की कमी लानी है।

दूसरा, विकसित देशों ने 10 साल में एक खरब डॉलर के हरित कोष का वादा किया था, लेकिन इसकी दो फीसदी राशि ही दी। वे इस वादे को पूरा करें ताकि गरीब और विकासशील देश इस खतरे से निपटने के लिए कमर कसें। उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र की मदद को इसमें न जोड़ा जाए। तीसरे में, जावड़ेकर ने कहा कि विकसित देश हरित तकनीकें उपलब्ध कराएं। हम आपदाओं का सामना कर रहे हैं जिससे निपटने के लिए तकनीकें मांग रहे हैं, लाभ कमाने के लिए नहीं। उन्होंने इसके लिए संयुक्त शोध की जरूरत भी बताई।

चौथा मुद्दा जावड़ेकर ने कार्बन बाजार का उठाया। उन्होंने कहा कि क्योटो प्रोटोकोल में संचालित कार्बन बाजार (सीडीएम) को पेरिस समझौते के अनुच्छेद-6 में जारी रखा जाए ताकि जिन कंपनियों ने कार्बन ट्रेडिंग में निवेश कर रखा है, उन्हें इसका फायदा आगे भी मिले। बता दें कि विकसित देश क्योटो के प्रावधानों के तहत आगे कार्बन कारोबार को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं। वे पेरिस समझौते में नए मैकेनिज्म पर जोर दे रहे हैं।

जावड़ेकर ने पांचवां मुद्दा जलवायु क्षति का उठाया है। उन्होंने कहा कि वारसॉ इंटरनेशनल मैकेनिज्म के तहत जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप होने वाली क्षति के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया जाए। दरअसल, इस मामले पर भी विकसित देश उत्साह नहीं दिखा रहे हैं। उन्हें डर है कि इसके लिए भी वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके ऊपर डाली जा सकती है।

भारत के प्रयासों का ब्यौरा दिया
इस मौके पर जावड़ेकर ने जलवायु खतरों से निपटने के लिए भारत के प्रयासों का ब्यौरा भी रखा। उन्होंने कहा कि भारत को 2030 तक उत्सर्जन में 35 फीसदी की कमी करनी है, जबकि 21 फीसदी कमी वह हासिल कर चुका है। जावड़ेकर ने सभी देशों से पेरिस समझौते का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया।

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  • Web Title:COP 25 Prakash Javadekar target developed countries says they should fulfill their responsibility