एसएफसी के पास भागलपुर-बांका के सहकारी समितियों का 117 करोड बकाया
हिन्दुस्तान विशेषहिन्दुस्तान विशेष सीएमआर के मद में बकाया है राशि समितियों को ब्याज के तौर पर हर दिन भरना पड रहा 4 लाख बांका में सीएमआर के वि

बांका। निज प्रतिनिधि। किसानों से एमएसपी पर खरीद किये गये धान से चावल तैयार कर राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराये जाने के बावजूद सहकारी समितियों को राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के मद में राज्य खाद्य निगम के पास भागलपुर एवं बांका जिले के सहकारी समितियों का 117 करोड रूपये बकाया है। इसमें सीएमआर के मद में एसएफसी के पास बांका जिले के 176 समितियों के 98 करोड रूपये बकाया हैं। आवंटन के अभाव में लंबे समय से सीएमआर मद की राशि का भुगतान नहीं होने से सहकारी समितियों पर ऋण एवं ब्याज का बोझ बढता जा रहा है। समय पर सीएमआर की राशि का भुगतान नहीं होने से हर दिन पैक्सों एवं व्यापार मंडलों को करीब चार लाख रूपये ब्याज भरना पड रहा है। ऐसे में कई सहकारी समितियां दिवालिया होने के कगार पर खडी है। खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में बांका जिले को 15 नवंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 1 लाख 22 हजार 96 एमटी धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया था। जिसमें सहकारिता विभाग ने 176 सहकारी समितियों के जरिये 17 हजार 235 किसानों से 1 लाख 22 हजार 68 एमटी धान की खरीद की। जो लक्ष्य का 99.98 प्रतिशत है। इसके बाद सहकारिता विभाग को 31 जुलाई तक एमएसपी पर खरीदे गए धान से 67 फीसदी के हिसाब से 83443.976 एमटी चावल राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराना था। जिसमें निर्धारित समय तक 168 सहकारी समितियों ने एसएफसी के संग्रहण केंद्र में 82689.896 एमटी सीएमआर जमा कराया है। जो लक्ष्य का 99.09 प्रतिशत है। इसके एवज में एसएफसी को सहकारी समितियों के बीच 304.58 करोड रूपये का भुगतान करना है। लेकिन अब तक एसएफसी ने महज 67.56 फीसदी यानी 205.78 करोड रूपये का ही भुगतान किया है। जबकि अब भी सीएमआर के मद में एसएफसी के पास सहकारी समितियों का 98.80 करोड रूपये बकाया है। जिससे सहकारी समितियों पर ब्याज का बोझ बढता ही जा रहा है और वे त्राहिमाम हैं। सहकारी समितियों को मिलने वाले कमिशन, हथलन और परिवहन की राशि भी ब्याज भरने में जा रही है। कई सहकारी समिति अन्य स्त्रोतों से अमानत लेकर ब्याज का भुगतान कर रही है। ऐसे में कई सहकारी समितियों ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद करने में अपने हाथ खडे करने का मन बना रही है। क्योंकि, धान अधिप्राप्ति के लिए को-ऑपरेटिव बैंक से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। वहीं, सीमएआर की राशि का भुगतान लंबित रहने से बढ रहे ब्याज के बोझ के मुद्दे पर पैक्सों व व्यापार मंडलों के अध्यक्षों के बैठकों का सिलसिला जारी है.
8 फीसदी ब्याज दर पर सहकारी समितियों को दी गई है सीसी लिमिट
किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए सहकारी समितियों को सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक ने आठ फीसदी ब्याज पद पर सीसी लिमिट दिया है। धान खरीद के लिए बैंक की ओर से ऋण के तौर पर दी गई सीसी लिमिट की राशि सीएमआर मद में होने वाले भुगतान से वसूल की जाती है। यहां 176 सहकारी समितियों के जरिये किसानों से एमएसपी पर खरीद किए गए धान से चावल तैयार करने के लिए राज्य खाद्य निगम ने 17 चाल मिलों को निबंधित किया था। जिसमें 11 उसना एवं 6 अरवा चावल मिल शामिल है। जिसके माध्यम से सहकारी समितियों ने खरीद किए गए धान से चावल तैयार कर एसएफसी को उपलब्ध कराया है.
वर्जन...
जिले में सहकारी समितियों ने एमएसपी पर खरीद किए 1 लाख 22 हजार 68 एमटी धान के एवज में 82681.896 एमटी सीएमआर उपलब्ध कराया है। उपलब्ध कराए गए सीएमआर के मद में सहकारी समितियों के बीच 304.58 करोड रूपये भुगतान किया जाना है। इसमें अब तक 205.78 करोड रूपये भुगतान कर दिए गए हैं। जबकि आंवटन नहीं रहने की वजह से 98.80 करोड रूपये का भुगतान लंबित है। आवंटन मिलते ही राशि का भुगतान कर दिया जाएगा.
फरहान अख्तर, जिला प्रबंधक, एसएफसी।
वर्जन...
भागलपुर एवं बांका जिले के सहकारी समितियों ने एमएसपी पर किसानों से खरीद किए गए धान के समतुल्य सीएमआर एसएफसी को उपलब्ध करा दिया है। बावजूद इसके अब तक सीएमआर के मद में भागलपुर एवं बांका जिले के सहकारी समितियों का 117 करोड रूपये बकाया है। जिससे समितियों की गाढी कमाई बैंक को ब्याज चुनाने में जा रही है। सीएमआर मद की राशि का भुगतान नहीं होने से समितियों पर ऋण व ब्याज का बोझ बढ रहा है.
जितेंद्र कुमार सिंह, चेयरमेन, दी भागलपुर को-ऑपरेटिव बैंक


