मेच्योरिटी के बाद भी नहीं दी राशि, अब देना होगा हर्जाना
कानपुर में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मामले में पीड़ित को 1,05,700 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही निवेश की राशि पर 9% ब्याज और मानसिक कष्ट के लिए 40,000 रुपये हर्जाना निर्धारित किया है। मामला निपटाने में सहारा इंडिया कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया गया।

कानपुर, प्रमुख संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार, सदस्य नीलम यादव व वन्दना सिंह ने एक मामले में सुनवाई करते हुए पीड़ित वादी को 1,05,700 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। निवेश की गई राशि परिपक्व होने की तिथि 11 दिसंबर 2018 से भुगतान तक नौ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इस दौरान वादी को हुए मानसिक कष्ट के लिए 40 हजार रुपये हर्जाना और 15 हजार रुपये वाद व्यय भी मिलेगा। हेमंत विहार बर्रा दो निवासी जसविन्दर कौर ने प्रबंधक सहारा इंडिया अलीगंज लखनऊ और काकादेव शाखा के प्रबंधक के खिलाफ आठ फरवरी 2022 को मुकदमा दाखिल किया था।
बतौर आरोप उन्होंने दो, नौ और 11 जून 2012 को तीन पॉलिसी बांड सहारा क्यू शाप यूनिक प्रोडक्टर रेंज लिमिटेड के अंतर्गत एडवांस फार क्यू शाप गुड्स प्लान के तहत लिए थे। इसके लिए उन्होंने 21750, 21750 और 9350 रुपये तीन हिस्सों में नकद जमा किया था। तीनों बांड की मेच्योरिटी साढ़े छह वर्ष में होनी थी। राशि उन्हें डबल मिलनी थी। मेच्योरिटी तिथि के बाद उन्होंने भुगतान के लिए प्रार्थनापत्र दिया। इस पर उन्हें बताया गया कि तीनों पालिसियां तीन वर्ष की अन्य स्कीम सुपर बीबी में परिवर्तित कर दो या तीन वर्ष में दोगुणा कर भुगतान किया जाएगा। इसके प्रमाणपत्र भी दिए गए। तय अवधि के बाद जुलाई 2021 में भुगतान को कहा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जिसके बाद 30 सितंबर 2021 को नोटिस दिया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। आयोग से नोटिस तामीला होने के बाद भी कंपनी की ओर से पक्ष नहीं रखा गया। न ही कोई अधिवक्ता आयोग में उपस्थित हुआ।


