छात्रों के आइडिया से विकसित होंगे नए स्टार्टअप : पाठक
कन्नौज के पारंपरिक इत्र उद्योग को आधुनिक विज्ञान और एआई से जोड़कर नए उत्पाद व स्टार्टअप विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने इस पर जोर दिया। विद्यार्थी एरोमा टूलकिट प्राप्त करते हैं और उद्योग से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की जाती है।

कानपुर, प्रमुख संवाददाता। कन्नौज के पारंपरिक इत्र उद्योग को आधुनिक विज्ञान और एआई से जोड़कर नए उत्पाद व स्टार्टअप विकसित किए जा सकते हैं। यह कहना है सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक का। फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर (एफएफडीसी), कन्नौज में शनिवार को एमएससी केमिस्ट्री (फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर) और एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में इस दिशा में नवाचार और उद्यमिता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ल ने इसका शुभारंभ किया। विद्यार्थियों को एरोमा टूलकिट भी वितरित की गई। कुलपति ने एमएससी फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर के विद्यार्थियों के उत्पादों की प्रदर्शनी देखी और उनके प्रोजेक्ट, नवाचार व उत्पादों की संभावनाओं पर चर्चा की। स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष योगेश दुबे और फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन कन्नौज के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे。
एआई से बढ़ेंगे नवाचार के अवसर
कोर्स समन्वयक डॉ. इंद्रेश कुमार शुक्ला ने विद्यार्थियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण, प्रोजेक्ट और अब तक के कार्यों की जानकारी दी। प्रो. पाठक ने कहा कि फ्रेगरेंस और फ्लेवर उद्योग तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान और उद्यमिता से जोड़ना जरूरी है। उनके वैज्ञानिक विचारों और नवाचारों से नए उत्पाद व स्टार्टअप विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग सुगंधित अणुओं के अध्ययन, कच्चे पदार्थों के चयन, फॉर्मुलेशन डिजाइन, डाटा विश्लेषण और नए उत्पादों के विकास में किया जा सकता है। सीएसजेएमयू विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग की संभावनाओं पर काम करेगा।
उद्यमिता की संभावनाएं
आवश्यक तेल, प्राकृतिक सुगंध, परफ्यूम, फ्लेवर, कॉस्मेटिक्स और वेलनेस उत्पादों के क्षेत्र में रोजगार के साथ उद्यमिता की भी संभावनाएं हैं। कार्यक्रम में भविष्य में वेलनेस से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कन्नौज की पारंपरिक इत्र निर्माण कला और भारतीय सुगंध एवं ज्ञान परंपरा को आधुनिक रसायन विज्ञान, एआई और नई तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया। सीएसजेएमयू-एफएफडीसी के शैक्षणिक सहयोग से संचालित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को औद्योगिक प्रशिक्षण, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है。


