कांग्रेस ने सही वक्त पर बदला छात्र आंदोलन का रुख
राजनीति में वक्त बहुत अहम होता है। कांग्रेस ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन को अपने हाथ में लिया। सीजेपी के आंदोलन से दूर रहते हुए, कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन बढ़ाने का निर्णय लिया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों के मुद्दे को उठाया और कानूनी मदद देने का ऐलान किया।

राजनीति में वक्त बहुत अहम होता है। किस वक्त क्या निर्णय लेना है, पूरी सियासत इस पर टिकी होती है। पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन को जिस अंदाज और वक्त पर कांग्रेस ने अपने हाथ में लिया है, उसने भाजपा और सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। कांग्रेस अब पूरे आंदोलन के केंद्र में आ गई है। नीट पेपर लीक के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनाई और छात्रों की गूंज कार्यक्रम शुरू किया। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर आंदोलन से दूर रही। क्योंकि, पार्टी के एक बड़े तबके का मानना था कि सीजेपी का पूरा आंदोलन भाजपा द्वारा प्रायोजित है।
कानूनी मदद का फैसला :
सीजेपी की अपील के बाद राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे, पर वह भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक तक सीमित रहे। पार्टी खुलकर समर्थन में नहीं आई। मानसून सत्र से पहले सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस चुप रही।
छात्रों का आंदोलन :
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सोमवार को संसद मार्च में जिस अंदाज में विभिन्न राज्यों से छात्र जुटे और पूरे दिन आंदोलन चला। उससे साफ हो गया है कि छात्रों और युवाओं में सरकार के खिलाफ बेहद नाराजगी है। इसलिए, कांग्रेस ने अपना रुख बदलते हुए आंदोलन को नई दिशा और ऊंचाई देने का फैसला किया। इसके बाद तस्वीर बदल गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पूरी ताकत से छात्रों के मुद्दे को उठाया। सरकार पर संसद के अंदर चर्चा का दबाव बनाने के लिए राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। वहीं, कई कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे।
कांग्रेस के निर्णय :
कांग्रेस ने अपनी कानूनी टीम को विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए और हमले के पीड़ित युवाओं को हरसंभव मदद देने का ऐलान किया। इससे साफ है कि पार्टी ने छात्रों के आंदोलन के नेतृत्व को अपने हाथ में लेते हुए सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाना चाहती है।
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