कांग्रेस चुनावी फार्म में, भीड़ को वोट बैंक में बदलने की चुनौती ?
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटी हुई है। हल्द्वानी में 'विजय शंखनाद रैली' में पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बात की। हालांकि, गुटबाजी और बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाना पार्टी के लिए चुनौती है।

हल्द्वानी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटी हुई है। अल्मोड़ा की 'विजय संकल्प रैली' के बाद कांग्रेस ने हल्द्वानी में रामलीला मैदान में 'विजय शंखनाद रैली' अपनी सियासी ताकत दिखाई। रैली में पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र व राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ाने के साथ-साथ महंगाई, बेरोजगारी, युवाओं के भविष्य और प्रदेश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से बात रखी। कार्यकर्ताओं में जोश भरा। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह तो भरा है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस इस चुनावी माहौल को वोट में बदल पाएगी? रैलियों के बाद अब कांग्रेस के सामने असली परीक्षा सड़क और बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की है।
3 महीने में 3 बड़ी रैलियां
हल्द्वानी। कांग्रेस बीते कुछ महीनों से राज्य में वोटरों को अपने पक्ष में साधने के लिए माहौल बनाने में जुटी है। बीते 4 जून को अल्मोड़ा के सिमकनी मैदान में 'विजय संकल्प रैली' में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को शामिल होना था। हालांकि, खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सका, जिसके बाद उन्होंने फोन के माध्यम से ऑनलाइन ही जनसभा को संबोधित कर कार्यकर्ताओं में जोश भरा। बीते 17 जुलाई को राहुल गांधी खुद देहरादून पहुंचे, जहां उन्होंने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शिरकत की। यहां उन्होंने युवाओं, बेरोजगारी और प्रतियोगी छात्रों से सीधा संवाद कर भर्ती घोटालों व पेपर लीक के खिलाफ बिगुल फूंका था। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे ने हल्द्वानी की शंखनाद रैली से राज्य में चुनावी रणनीति को और तेज कर दिया है।
इन चुनौतियों से पार कैसे पाएगी कांग्रेस
नेता एकजुट, पर गुटबाजी से निपटना चुनौती: मंच पर भले ही पार्टी के सभी शीर्ष और दिग्गज नेता एक साथ नजर आए हों, लेकिन जमीनी व स्थानीय स्तर पर गुटबाजी को खत्म करना संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
टिकट के दावेदारों को साधना: चुनावों की सुगबुगाहट के साथ ही कई सीटों से दावेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। ऐसे में असंतोष को रोकते हुए सभी दावेदारों को एक साथ साधे रखना पार्टी नेतृत्व के लिए कठिन परीक्षा होगी।
बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाना: रैलियों में जुट रही भीड़ को चुनावी वोट में बदलने के लिए बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय मोड में लाना भी बड़ी चुनौती होगी।
युवा व छात्र संगठनों की भूमिका: राज्य में पेपर लीक और बेरोजगारी से नाराज युवाओं को सीधे चुनावी अभियान से जोड़ने के लिए यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को फ्रंट फुट पर लाने की रणनीति तैयार करनी चुनौती होगी।
हम आ रहे हैं, सबको चिह्नित किया जा रहा है: यशपाल
हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा से ठीक पहले हल्द्वानी में कोतवाली में प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का रुख पुलिसकर्मियों के प्रति बेहद तल्ख नजर आया। उन्होंने कोतवाली में मौजूद पुलिसकर्मियों की तरफ इशारा करते हुए खुले शब्दों में चेताया हम आ रहे हैं, सबको चिह्नित किया जा रहा है।


