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फिर साथ आ रहे 'यूपी के लड़के', प्रियंका गांधी ने निभाई अहम भूमिका; कैसे एक फोन कॉल से बन गई बात

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से फोन पर बात की और फिर दोनों टूटता दिख रहा गठबंधन वापस ट्रैक पर आ गया। अब कांग्रेस-सपा में अलायंस हो गया है।

फिर साथ आ रहे 'यूपी के लड़के', प्रियंका गांधी ने निभाई अहम भूमिका; कैसे एक फोन कॉल से बन गई बात
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊWed, 21 Feb 2024 05:43 PM
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SP-Congress Alliance: आगामी लोकसभा चुनाव में अब महज कुछ ही महीने बचे हुए हैं। सबसे ज्यादा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से यूपी के लड़के साथ नजर आने वाले हैं। दरअसल, यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन फाइनल हो गया है। कई दिनों से चल रहे विभिन्न तरह के कयासों के बीच बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अंत भला तो सब भला। गठबंधन होगा और कोई विवाद नहीं है। बहुत जल्द ही चीजें साफ हो जाएंगी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस को अखिलेश यादव 17 सीटें देंगे। हालांकि, वाराणसी सीट भी कांग्रेस को दी जाएगी। इस पर सपा ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था, लेकिन अब कैंडिडेट को पार्टी वापस ले लेगी। सपा और कांग्रेस के बीच इस गठबंधन को पटरी पर लाने के पीछे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा बताई जा रही हैं।

दरअसल, लोकसभा चुनाव के लिए पिछले साल बनाए गए इंडिया गठबंधन में सपा और कांग्रेस, दोनों ही दल शामिल हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों में बात नहीं बन पा रही थी। सबसे पहले कांग्रेस को 11 सीटें देने का ऐलान किया गया था, जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद तमाम उठापटक के बाद फाइनली कांग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों की मानें तो मंगलवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से फोन पर बात की और फिर दोनों टूटता दिख रहा गठबंधन वापस ट्रैक पर आ गया। सपा ने बीते दिन तीसरी सूची का भी ऐलान कर दिया था, जिसके बाद उसमें से वाराणसी सीट कांग्रेस को दी जाएगी।

सपा ने कांग्रेस को रायबरेली, अमेठी, कानपुर, फतेहपुर सीकरी, बांसगांव, सहारनपुर, प्रयागराज, महाराजगंज, वाराणसी, अमरोहा, झांसी, बुलंदशहर, गाजियाबाद, मथुरा, हाथरस, बाराबंकी और देवरिया सीट दी है। कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन के ऐलान के लिए बुधवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया गया है, जिसमें दोनों दलों के नेता मौजूद रह सकते हैं। इस पीसी में अजय राय, नरेश उत्तम पटेल आदि नेताओं के मौजूद रहने की संभावना है।

फिर साथ आ रहे 'यूपी के लड़के'
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन पहली बार नहीं हो रहा है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी दानों दलों ने अलायंस करके चुनाव लड़ा था। तब अखिलेश यादव और राहुल गांधी को 'यूपी के लड़के' बताकर मैदान में उतारा गया था। हालांकि, दोनों दलों के साथ चुनाव लड़ने के बाद भी कोई बड़ी सफलता नहीं मिल सकी थी और बीजेपी की यूपी विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हुई थी, जिसके बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया था। सपा और कांग्रेस की करारी हार के चलते चुनाव के बाद अलायंस टूट गया और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश और मायावती की पार्टी के बीच गठबंधन हुआ। सपा-बसपा के साथ आने के बाद भी कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ और एनडीए ने बड़ी जीत दर्ज की। अब एक बार फिर से यूपी में सपा और कांग्रेस साथ आ रहे हैं। 

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