DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Hindustan Exclusive-युवाओं को कांग्रेस में भविष्य दिख रहा : राहुल गांधी

rahul gandhi  file photo pti

राहुल गांधी लोकसभा चुनावों के सिलसिले में पूरे देश का सघन दौरा कर रहे हैं। इसी बीच ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर से उन्होंने विस्तार से बात की। विशेष विमान से गुजरात में सूरत से कर्नाटक के बेलगाम की उड़ान के दौरान उन्होंने कठिन से कठिन सवालों के बेबाक जवाब दिए। पेश है लम्बी बातचीत के सम्पादित अंश : 

आप देश भर में चुनावी दौरे कर रहे हैं। इस दौरान कैसा महसूस हो रहा है? कांग्रेस के लिए कैसे परिणाम आने वाले हैं?

पॉजिटिव’ नतीजे आएंगे, क्योंकि देश भाजपा से निराश है और बदलाव चाहता है।

अगर नंबर में बात करें तो?
नंबर की बजाय आप जनता का मूड देखिए। बदलाव का माहौल साफ नजर आता है। तीन कारण हैं। पहला -बेरोजगारी चरम सीमा पर है, युवा बेचैन हैं, परंतु श्री नरेंद्र मोदी रोजगार की बात भी नहीं कर रहे। कांग्रेस के लिए युवा और रोजगार प्राथमिकता हैं। दूसरा -खेती और किसान संकट में हैं पर मोदी जी बेखबर हैं। किसानों को लेकर हमारा रिकॉर्ड आपको मालूम है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, कर्नाटक में हमने 72 घंटे में किसान की कर्जमाफी करके दिखाई। तीसरा मुद्दा है -चारों तरफ फैला भ्रष्टाचार, खासतौर पर राफेल के भ्रष्टाचार का, जिसमें मोदी जी की भूमिका साफ है।

गुजरात चुनाव के बाद कांग्रेस को जो बढ़त मिलनी शुरू हुई, क्या आपको लगता है कि उससे अच्छे रिजल्ट की उम्मीदें और बढ़ गयी हैं?
नहीं, उल्टा है। कांग्रेस की ‘परफॉर्मेंस’ आपके अनुमान से अधिक बेहतर होने वाली है। यह अखबार में, टेलीविजन चैनल पर अभी पूरा दिखाई नहीं देता, क्योंकि हम जानते हैं कि भाजपा सरकार इश्तेहार और सरकार, दोनों का दबाव डालती है। 

ऐसा नहीं है, बहुत सारे ‘रीजनल’ अखबारों में अच्छी बातें छपती हैं जो ऊपर नहीं आ पातीं। 

यह आपने सही कहा। क्षेत्रीय अखबार ज्यादातर राष्ट्रीय अखबारों से साहसी हैं। वे जनता की आवाज पुरजोर तरीके से उठाते हैं।

देश के जो सबसे बड़े राज्य हैं, यूपी, बिहार, तमिलनाडु आदि, यहां आप बहुत दिनों से सत्ता में नहीं हैं। इसका असर संगठन पर पड़ा है। क्या वहां बेहतर नतीजे पाने में तकलीफ आने वाली है? 

तमिलनाडु में हमारे गठबंधन की कामयाबी सबका सफाया कर देगी। कांग्रेस वहां सभी सीटें जीतेगी, ऐसा मेरा विश्वास है। बिहार का गठबंधन भी बेहतरीन नतीजे
लेकर आएगा। उत्तर प्रदेश में हम अलग लड़ रहे हैं, पर फिर भी कांग्रेस सीटें जीतेगी। यूपी में हमने इसीलिए प्रियंका जी और सिंधिया जी को भेजा। बिहार में हमारे प्रभारी, शक्ति सिंह गोहिल जी ने अच्छा काम किया है। तमिलनाडु भी कांग्रेस के लिए बहुत ‘पॉजिटिव’ है।

उत्तर प्रदेश में आपने गठबंधन नहीं किया। लोगों को लगता था आप गठबंधन करेंगे? 

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने गठबंधन न करने का निर्णय किया। हम चाहते थे कि सब मिलकर लड़ें पर मैं उनके निर्णय का सम्मान करता हूँ। मायावती जी अखिलेश जी का हम आदर करते हैं। हम अकेले लड़ रहे हैं पर अच्छे नतीजे लाएंगे।

दिल्ली में भी बहुत दिनों तक गठबंधन की बात चलती रही। उसके बाद क्या हुआ? 
हमने दिल्ली में साफ कहा कि भाजपा को हराने के लिए हम आम आदमी पार्टी से गठबंधन को तैयार हैं। चार-तीन के फार्मूले पर सहमति भी बनी पर न जाने क्यों, उन्होंने अपनी सोच बदल ली? अब वो हरियाणा की बात करते हैं, पंजाब की बात करते हैं, गोवा की भी बात करते हैं। दिल्ली में गठबंधन न करने का निर्णय उनका है। हमने कह दिया है कि चार सीट आप लड़ें और तीन सीट कांग्रेस लड़ेगी, क्योंकि हम भाजपा को दिल्ली में हराना चाहते हैं।

चुनाव एक मुद्दा है और संगठन दूसरा। कांग्रेस अध्यक्ष के नाते चुनावी राजनीति में आप काफी सफल रहे हैं। क्या संगठन के लिए कोई खास कदम उठाने जा रहे हैं, इस चुनाव के बाद? 

इस चुनाव के बाद क्यों, ये सारी सफलताएं संगठन के बल बूते ही मिली हैं। हमने नेतृत्व त्याग किया है। ‘शक्ति’ जैसा हमारा सिस्टम तैयार हुआ है। कार्यकर्ताओं से हम जुड़े हैं। कार्यकर्ताओं से हमने इनपुट लिया है। अभी शुरुआत है। हम कांग्रेस पार्टी को तकनीकी तौर से ‘एडवांस और डेमोक्रेटिक’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके विपरीत जो हमारा विपक्ष है, वो कभी प्रजातांत्रिक हो ही नहीं सकता। वहां तो ‘टॉप-टू-डाउन’ सिस्टम है।

एक तरफ आप संगठन को मजबूत कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ इलेक्शन के दौरान बहुत से लोग आप के यहां से जा रहे हैं। जैसे गुजरात में छह से ज्यादा एमएलए ने पार्टी छोड़ी है, आज प्रियंका चतुर्वेदी ने छोड़ दिया। जो जवान लोग हैं जैसे जिग्नेश मेवाणी आदि, वह लेफ्ट के प्रति ज्यादा करीबी दिख रहे
हैं। ऐसा क्यों?

जब अल्पेश जी, जिग्नेश जी, हार्दिक जी ने ‘ज्वाइन’ किया था, तो देश में अलग-अलग लोग हमसे जुड़ रहे थे पर उनकी बात तो आप नहीं कर रहे हैं? आप उन लोगों की बात कर रहे हैं, जो छोड़कर गए! मैं आपको सच बताऊं, तो इससे कांग्रेस को फायदा हुआ। आपको सोचना होगा कि ये किस प्रकार के लोग हैं? किस मानसिकता के लोग हैं, इनका योगदान क्या है, इनकी क्षमता क्या है? हमारी लड़ाई विचारधारा की है। जो विचारधारा के लिए लड़ता है, वो हमको कभी नहीं छोड़ेगा। जो मौकापरस्त हैं, वो छोड़  देते हैं।  ऐसे लोगों के छोड़ने से मैं परेशान नहीं होता हूँ। जो राजनीतिक क्षमता और विचारधारा से भरा है, उसको तैयार करने में सालों लगते हैं। उसमें सेवा की भावना होती है, त्याग की भावना होती है। कांग्रेस पार्टी में ऐसे बहुत लोग हैं। बहुत समय के लिए ऐसे लोगों को दबाया गया। इनको कई बार रोक कर रखा गया। अब जो वास्तविक कार्यकर्ता है, विचारधारा से जुड़ा है, जमीनी है, किसान का नुमाइंदा है, युवाओं का नुमाइंदा है, उसको कांग्रेस पार्टी में विश्वास और भविष्य दिख रहा है।

जाति की राजनीति एक हकीकत है। इस देश में कांग्रेस का एक वोट बैंक हुआ करता था, खास तौर से उत्तरी भारत में सवर्ण, दलित और मुस्लिम। क्या ये ‘वोट बैंक’ अब भी कायम है?

मैं ऐसा नहीं मानता। यह आपकी शंका है कि ये वोट बैंक हैं। कांग्रेस सबकी पार्टी है और कांग्रेस का काम सबको मदद करने का है। मैं आपको दो-तीन उदाहरण देता हूं। नोटबंदी और जीएसटी से छोटे दुकानदारों व व्यवसायियों को चोट लगी और वो लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी। जब किसान पर विपदा आती है, तो कांग्रेस सबसे आगे खड़ी हो जाती है। कांग्रेस की प्रकृति है, कि जहां भी हिंदुस्तान में दर्द है, उसको सुनना और उसका हल निकालना। दर्द की दवा देने वाली यही सोच ही कांग्रेस का वोट बैंक है। बाकी सब मीडिया की सोच है, वास्तविकता नहीं। कांग्रेस देश के साथ खड़ी होगी, देश के लिए काम करेगी, देश के लोगों से गले मिलेगी, और यही कांग्रेस है। हमारे लिए हर हिंदुस्तानी कांग्रेस की विचारधारा का आईना है।

आज मैं सूरत में पांच घंटे घूमता रहा। एक चौक पर ऐसे ही गाड़ी रोकी। कई दिहाड़ी मजदूर काम की तलाश में हमारी ओर लपके। इसी तरह व्यापारी जी.एस.टी. से बहुत निराश हैं। जब मैंने पूछा कि वोट किसको दे रहे हो तो ‘गुजराती प्राइड’ याद आ गया। क्या आप इस असंतोष को लोकसभा के चुनाव में भुना पाएंगे? 

एक बात याद रखिए। गुजरात को बीजेपी-आरएसएस का गढ़ माना जाता था परंतु गुजरात के विधानसभा चुनाव में भाजपा लगभग धराशायी हो गयी। वो भी
इसके बावजूद कि नरेंद्र मोदी-अमित शाह ने हर प्रकार की ताकत यहां लगा डाली। क्या आप जानते हैं कि सूरत में कैसे-कैसे दबाव डाले गए? किस प्रकार से इनकम टैक्स विभाग और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया। गुजरात के नतीजे चौंकाने वाले होंगे। इस लोकसभा चुनाव में गुजरात कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त बहुमत देने जा रहा है। नोटबंदी ने, गब्बर सिंह टैक्स ने, और नरेंद्र मोदी जी की नीतियों ने अनिल अंबानी-नीरव मोदी-मेहुल चोकसी जैसे लोगों को तो फायदा दिया, पर इससे हिंदुस्तान की ‘इकॉनॉमी का इंजन’ जाम हो गया। इसलिए आपको बहुत सारे बेरोजगार मजदूर यहां मिले। सच्चाई यह है कि जनता की ‘पर्चेजिंग पॉवर’ को मोदी सरकार ने एक तरह से नष्ट कर दिया। अगर हम उस ‘पर्चेजि़ंग पॉवर’ को ताकत नहीं देंगे और हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को दोबारा चालू नहीं करेंगे, तो देश आगे कैसे बढ़ेगा? हमने पिछले पांच-छह महीने इसी काम में लगाए कि देश की अगली कांग्रेस सरकार हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को कैसे ‘जंपस्टार्ट’ कर सके। 

आपने इनकम टैक्स विभाग की बात की। आरोप है कि तमाम संस्थान टूट से गये हैं। जब बीजेपी के लोगों से पूछते हैं तो वो पुराने उदाहरण देने लगते हैं। एक नई सदी के राजनेता के तौर पर इन संस्थानों की निष्पक्षता और सम्मान बहाली के लिए आप क्या करेंगे?

हिंदुस्तान की ताकत उसकी संस्थाएं हैं, जो सरकारों को जवाबदेह बनाती हैं और प्रजातंत्र को मजबूत। संस्थाओं की विशेष जगह है, उनकी ताकत है, उनका सम्मान है। श्री नरेंद्र मोदी ने देश की अलग-अलग संस्थाओं को कमजोर कर प्रजातंत्र को कमजोर करने की कोशिश की है। इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी की प्रकृति संस्थाओं की मजबूती के जरिए प्रजातंत्र को मजबूत करना है। आप आरबीआई के गवर्नर से पूछिए, प्लानिंग कमीशन के प्रमुख से पूछिए, या देश चलाने वाली किसी भी संस्था के ‘स्टेकहोल्डर’ से, नरेंद्र मोदी जी ने आरबीआई, प्लानिंग कमीशन, सुप्रीम कोर्ट, सबका अपमान किया है। यहां तक कि देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को मजबूर होकर हिंदुस्तान की जनता से न्याय मांगना पड़ा। यह है नरेंद्र मोदी जी की नीति। यह समझ लीजिए कि जवाब और जिम्मेवारी लोकतंत्र का आईना हैं। 

पहले एक राजनैतिक शिष्टाचार था। लोग एक दूसरे से अच्छे से व्यवहार करते थे। क्या वो खत्म हो गया?

देखिए, आज भी सुषमा जी, राजनाथ सिंह जी, मनमोहन सिंह जी, गडकरी जी सम्मान से बात-चीत करते हैं। मतलब, राजनैतिक तंत्र में परस्पर सम्मान मौजूद है। परंतु, नरेंद्र मोदी जी के तौर-तरीके का असर देश के ‘सिस्टम’ पर जरूर पड़ रहा है। देखिए, हिंदू धर्म में गुरु का दर्जा सबसे बड़ा है। नरेंद्र मोदी जी के गुरु आडवाणी जी हैं। मोदी जी ने उनका टिकट काटा, उनका अपमान किया और उनको हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया।

एनडीए राष्ट्रवाद पर चुनाव लड़ रही है और प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से टिकट दिया है। जब राष्ट्रवाद की बात होती है तो एक विशेष वर्ग को लगता है कि कांग्रेस सही तरीके से लड़ाई नहीं लड़ रही। आपकी क्या राय है?

राष्ट्रवाद और देश के लिए कुर्बानी का कांग्रेस का अपना एक रिकॉर्ड है। उसे जरूर देखिए और परखिए। अगर आप राष्ट्रवाद की बात करना चाहते हैं, तो स्वाभाविक तौर से देश को मजबूत बनाने की बात करना चाहते हैं। देश को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी चीज युवाओं के लिए रोजगार है। अगर देश में चारों तरफ बेरोजगारी ही बेरोजगारी होगी, तो देश मजबूत कैसे होगा? अगर देश का किसान हर रोज आत्महत्या करने को मजबूर होगा, तो देश तो कमजोर होगा ही। जो राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं, वो इन गंभीर सवालों का जवाब क्यों नहीं देते? पिछले पांच सालों में मोदी सरकार ने युवाओं के लिए क्या किया, किसान, गरीब मजदूर के लिए क्या किया? एक और सवाल भ्रष्टाचार से जुड़ा है। जब फ्रांस के राष्ट्रपति कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ने मुझसे मुलाकात में शर्त रखी कि राफेल का ‘ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट’ अनिल अंबानी जी की कंपनी को जाना है। 526 करोड़ का राफेल जहाज 1600 करोड़ से अधिक में खरीदा जाएगा और जहाज भी हिंदुस्तान में नहीं बनेगा। क्या यह व्यवहार राष्ट्रवादी हो सकता है?

आप नरेंद्र मोदी की तीन असफलताएं क्या मानते हैं?
बेरोजगारी, हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था का खात्मा, नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स। मोदी जी ने देश को ‘डिमोनेटाइज’ किया। हम ‘रिमोनेटाइज’ करेंगे। हम इसीलिए न्याय योजना लेकर आए हैं। उनकी एक और खामी है कि उन्हें कृषि क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी नहीं। नरेंद्र मोदी जी को यह समझ नहीं आता कि हिंदुस्तान की सबसे बड़ी ताकत खेती है और आप उसे दरकिनार नहीं कर सकते। उनकी एक और खामी है कि काले धन के खिलाफ लड़ाई में वो फेल साबित हुए हैं।

आपने न्याय के जरिए पॉलिटिकल नैरेटिव को बदलने की कोशिश की। आज सरकार के पास पैसे की तंगी है, तो फिर आप इसे आते ही कैसे लागू करेंगे?

हमने सदा अपना वादा निभाया है। हमने मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, कर्नाटक में किसान की कर्जमाफी की बात की। नरेंद्र मोदी जी ने कहा, किसान की कर्जमाफी के लिए पैसे नहीं हैं। हमने कांग्रेस सरकार बनने के 48 घंटे में किसान कर्जमाफी करके दिखाई। अब वो कह रहे हैं कि न्याय योजना का पांच करोड़ परिवारों के लिए 72,000 रुपया सालाना कहां से आएगा? मैं बताता हूँ कि वो मोदी जी के मुट्ठीभर उद्योगपति दोस्तों की जेब से निकालेंगे। न मध्यम वर्ग पर बोझ डालेंगे और न ही उनसे एक रुपया लेंगे और न ही आयकर बढ़ाएंगे। न्याय योजना हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को ‘रिमोनेटाइज’ करेगी। जैसे इंजन में पेट्रोल डाला जाता है, न्याय योजना देश की अर्थव्यवस्था में सीधे पेट्रोल डालकर पूरी अर्थव्यवस्था को ‘जंपस्टार्ट’ करेगी। इससे गरीब के हाथ में और पैसा आएगा, मांग बढ़ेगी, मैनुफैक्चरिंग बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार मिलेगा।

आप वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं पर स्मृति ईरानी कह रही हैं कि आप सुरक्षित सीट की तलाश में चले गए?
देखिए अमेठी मेरी कर्मभूमि है। मैं अमेठी से चुनाव लड़ता हूं, अमेठी से चुनाव लड़ूंगा। मैं दक्षिण भारत के साथियों को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं। आप जब दक्षिण भारत जाएंगे, वो चाहे केरल हो, तमिलनाडु हो, कनार्टक हो, तेलंगाना हो या आंध्रप्रदेश हो-सब जगह एक प्रबल भावना है कि उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही। यह हिंदुस्तान की एकजुटता के लिए सही नहीं। इस भावना को खत्म करने के लिए और दक्षिण भारत के हर भारतवासी को यह बताने के लिए कि आपकी आवाज भी सुनी जाएगी, कि आप भी इस देश का महत्वपूर्ण हिस्सा हो, कि आप भी हिंदुस्तान हो, मैं इसलिए वायनाड से चुनाव लड़ रहा हूं।

अगर आपको प्रधानमंत्री पद की शपथ लेनी हो तो पहले तीन काम आप क्या करेंगे?
देखिए, प्रधानमंत्री पद का निर्णय हिंदुस्तान की जनता के ऊपर है। जनता निर्णय करेगी पर मेरी प्राथमिकताएं हैं -हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को फिर से ढर्रे पर चढ़ाना। किसानों, मजदूरों के दर्द दूर करना। देश के नौजवान के लिए रोजगार और भविष्य का रास्ता बताना। आज युवा को भविष्य उज्जवल नहीं दिखता। हमें युवाओं के लिए नया रास्ता तैयार करना है।

क्या कारण है कि हर चुनाव में हमारे देश में पाकिस्तान चुनावी मुद्दा बनकर आ जाता है? 
याद कीजिए कि 2014 के चुनाव में मोदी जी ने क्या कहा था? चार बड़े वादे किए थे। पहला, सबसे खाते में 15-15 लाख जमा करवाएंगे। दूसरा, दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार दिलवाएंगे। तीसरा, किसानों को फसल की लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा दिलवाएंगे। चौथा, 80 लाख करोड़ कालाधन विदेशों से 100 दिन में वापस लेकर आएंगे। इन चारों वादों पर मोदी जी फेल हो गए और इसीलिए ध्यान भटका रहे हैं। इसके विपरीत, हमने वादा किया है कि देश के 20 प्रतिशत सबसे गरीब परिवारों के खातों में 72,000 रुपये सालाना डालेंगे। यानि 3,60,000 रु. पांच साल में। वो 15-15 लाख नहीं दे पाए, हम पांच करोड़ परिवारों को पांच साल में 3,60,000 देकर दिखाएंगे। दूसरा वादा, नौजवानों के लिए सभी खाली सरकारी पद  भरेंगे और नए रोजगार पैदा करेंगे। किसान को अलग बजट देंगे। तीसरा, हम भ्रष्टाचार से लड़ने की धार देश की जनता को देंगे। राफेल पहली शुरुआत है। नरेंद्र मोदी जी के पास अब अपने चुनावी वादों पर बोलने को कुछ नहीं बचा और इसीलिए वो ध्यान भटका रहे हैं। 

कुछ खास

क्या प्रियंका गांधी लोकसभा का चुनाव लड़ेंगी?

देखते हैं, अभी थोड़ी देर सस्पेंस रहने दीजिए।

हमने आपको लगातार कई जगहों पर पूजा करते हुए या धार्मिक स्थलों पर जाते हुए देखा। क्या आप अपने निजी जीवन में पूजा करते हैं?

मेरा काम मेरी सबसे बड़ी पूजा है। मेरा जो कर्म है, जो मेरे जीवन का रास्ता है, वह भी मेरी पूजा है। यह भारतीय संस्कृति भी है। अगर कोई व्यक्ति या समूह, जो किसी आराध्य में विश्वास करता है, वो चाहे किसी धर्म का भी हो, अगर मुझे अपने पूजास्थल पर या घर बुलाए, तो मैं अवश्य जाता हूँ। मैं उनकी धर्म भावना का सम्मान करता हूँ और समझता भी हूँ। यही भारत का रास्ता है।

आपके घर में तीनों लोग राजनैतिक जीवन से जुड़े हैं। क्या पारिवारिक समय में भी राजनीति पर चर्चा होती है?

पारिवारिक विषयों पर भी और राजनीति पर भी।

जैसे परिवार में कभी-कभी भाई-बहन में मीठा विवाद होता है, उदाहरण के तौर पर मेरी बहन की उम्र 55 साल से ज्यादा है, फिर भी हम लड़ लेते हैं। क्या आपका भी प्रियंका जी से किसी राजनैतिक मुद्दे पर विवाद होता है?

मैं बताता हूँ, न कभी हुआ और न कभी होगा। इसका कारण है। क्योंकि हमने हमारी दादी और पिता की कुर्बानी देखी है। हम दोनों ने देखा है कि परिवार और परिवार के संबंध जीवन में सबसे महत्वपूर्ण हैं। हम एक दूसरे की इज्जत भी करते हैं और एक दूसरे के साथ प्यार से काम भी करते हैं। कभी अगर असहमति हो, तो या तो वो मेरी बात मान लेती हैं या मैं उनकी बात मान लेता हूं। पर शायद ही कभी हमारी किसी विषय पर असहमति होती है।

कांग्रेस की सीटें संसद में कम थीं, पर कांग्रेस की शुरुआत सरकार के खिलाफ मुखर रही। अब यह माना जा रहा है कि आपकी और नरेंद्र मोदी की लड़ाई व्यक्तिगत होती जा रही है। क्या यह सही है?

मैंने तो उन्हें संसद में सबके सामने गले लगाया। आप मेरे सारे भाषण देख लीजिए। मैं कोई व्यक्तिगत अपमान नहीं करता हूँ। मैं प्यार से बोलता हूं। मैं उनके परिवार के बारे में कुछ नहीं बोलता। मैं उनके पिता, उनकी मां, या उनकी पत्नी के बारे में कुछ नहीं बोलता। मैं प्रधानमंत्री की इज्जत करता हूं। पर सच तो कहना पड़ेगा। जब नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि, ‘मैं चौकीदार हूं’ और दूसरी ओर राफेल मामले में श्री अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ दे दिए, तो उसे चोरी नहीं, तो क्या कहा जाएगा? मेरी कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं। मैं देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाता रहा हूं।

आप श्री नरेंद्र मोदी के गले मिले, कभी उनकी तरफ से भी आपको ऐसा व्यवहार देखने को मिला?
नहीं, ऐसा लगता है कि उन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी है। मुझे उनसे न कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है और न ही नफरत। मेरी लड़ाई विचारधारा की है। मैं उनकी विचारधारा के खिलाफ लड़ता हूँ। नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ न मेरे मन में गुस्सा है, न कोई बदला लेने की इच्छा। इसके विपरीत, उनके दिल में गुस्सा भी है और बदले की भावना भी। वो जब सार्वजनिक समारोह में मिलते हैं, तो अपना मुंह घुमा लेते हैं, अभिवादन लेना भी सही नहीं समझते और आमतौर पर दूसरे रास्ते से निकल जाते हैं।

Hindustan Exclusive: राफेल सौदे में मोदी जेल जा सकते हैंः राहुल गांधी

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Congress President Rahul Gandhi exclusive interview with hindustan