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कर्नाटक के बाद कांग्रेस का मिशन MP-CG शुरू, राजस्थान-तेलंगाना के नेताओं को भी बुलाया

हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में चुनावी जीत से उत्साहित कांग्रेस अब अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण आम चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अन्य चुनावी राज्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

कर्नाटक के बाद कांग्रेस का मिशन MP-CG शुरू, राजस्थान-तेलंगाना के नेताओं को भी बुलाया
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 21 May 2023 01:40 PM
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हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में चुनावी जीत से उत्साहित कांग्रेस अब अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण आम चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अन्य चुनावी राज्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। देश की सबसे पुरानी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने के लिए 24 मई को तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नेताओं की बैठक बुलाई है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

बीता सप्ताह कर्नाटक में कांग्रेस के लिए बड़ी जीत तो लेकर ही आया लेकिन, मुख्यमंत्री चुनने के लिए सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में से एक को चुनने के लिए दिल्ली से कर्नाटक तक कांग्रेस आलाकमान को काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि किसी तरह डीके को मनाया और सिद्धारमैया की ताजपोशी मुमकिन हो पाई। अब कर्नाटक की टेंशन दूर होने के बाद कांग्रेस की नजर तेलंगाना, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान पर ध्यान है। कांग्रेस आलाकमान ने आगामी 24 मई को मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में इन राज्यों के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई है।

राजस्थान में खींचतान
कांग्रेस पार्टी को कर्नाटक की तरह राजस्थान में भी ऐसी ही खींचतान का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान में, सचिन पायलट लगातार आलाकमान के सामने अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं को स्पष्ट कर रहे हैं। अपनी ही अशोक गहलोत सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी इस लड़ाई को दूर से देखकर वेट एंड वॉच की स्थिति में है। कांग्रेस के राज्य प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का कहना है कि पार्टी असंतुष्टों को बाहर नहीं करेगी, लेकिन याद दिलाती रहेगी कि अतीत में नेताओं ने पार्टी छोड़ने के बाद कैसा प्रदर्शन किया था?

एमपी में कांग्रेस की चिंता
मध्य प्रदेश, जहां कांग्रेस पार्टी से विद्रोह करके ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी के 22 विधायकों के साथ 2020 में 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार को गिरा दिया। कांग्रेस इस अपमान को अभी तक भूल नहीं पाई है। पार्टी के लिए एक और चुनौती यह है कि सिंधिया के अधिकांश वफादार विधायक आराम से भाजपा से फिर से चुनाव जीते। कांग्रेस को इस बार भाजपा को पछाड़ने की उम्मीद है क्योंकि पिछले दो दशकों में सत्ता में रहने के बाद उसे उम्मीद है कि बीजेपी भारी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर सकती है।

तेलंगाना में आर-पार की लड़ाई 
तेलंगाना में, कांग्रेस की कड़ी टक्कर चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली भारत राष्ट्र समिति से है। विपक्षी एकता दिखाने के बावजूद कांग्रेस बीआरएस से लगातार दूरी बनाकर चल रही है। यही वजह है कि कर्नाटक में सिद्धारमैया की ताजपोशी के दौरान कांग्रेस ने केसीआर को निमंत्रण तक नहीं भेजा। कारण साफ है- तेलंगाना चुनाव। इससे तेलंगाना में भले ही कांग्रेस की लड़ाई स्पष्ट हो जाएगी लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की योजना जटिल हो सकती है।

भारत जोड़ो यात्रा का इम्पेक्ट
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा निकाली गई भारत जोड़ो यात्रा भी इन राज्यों में चुनाव के लिए अहम है। कांग्रेस को उम्मीद है कि जिस तरह भारत जोड़ो यात्रा ने कर्नाटक में कमाल दिखाया, एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान में भी यह कमाल करेगी। कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद सिद्धारमैया और अन्य कांग्रेसी दिग्गजों ने राज्य में जीत के पीछे यात्रा को श्रेय दिया था।

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