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संसद में उठा 'एनिमल' का मुद्दा, कांग्रेस सांसद की शिकायत- मेरी बेटी ने रोते-रोते बीच में छोड़ी फिल्म

गुरुवार को शीतकालीन सत्र में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद ने एनिमल फिल्म का मुद्दा उठाया। महिला अत्याचार और हिंसा पर शिकायत करते हुए कहा कि मेरी बेटी ने रोते-रोते बीच में ही फिल्म छोड़ दी।

संसद में उठा 'एनिमल' का मुद्दा, कांग्रेस सांसद की शिकायत- मेरी बेटी ने रोते-रोते बीच में छोड़ी फिल्म
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 07 Dec 2023 02:24 PM
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गुरुवार को राज्यसभा में शीतकालीन संसद सत्र में गैर-विधायी मामलों पर चर्चा के दौरान रणबीर कपूर की टॉप स्कोरर फिल्म एनिमल पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने फिल्म एनिमल में हिंसा का मुद्दा उठाया। कबीर सिंह और एनिमल फिल्म का उदाहरण देते हुए सांसद ने आरोप लगाया कि फिल्मों में दिखाई जा रही हिंसा के कारण देश के युवाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जानबूझकर फिल्मों को सनसनीखेज बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनिमल फिल्म में महिलाओं का अपमान और इतनी जबरदस्त हिंसा है कि मेरी बेटी और उसकी दोस्त रोते-रोते फिल्म के बीच में से ही सिनेमा हॉल से बाहर निकल गए।

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने ने संसद में गैर विधायी मामलों पर चर्चा के दौरान कहा, "सिनेमा हमारे समाज का प्रतिबिंब है… हम फिल्में देखकर बड़े हुए हैं और इसका हम सभी पर विशेषकर युवाओं पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है। लेकिन 'कबीर सिंह', 'पुष्पा' और अब 'एनिमल' जैसी फिल्में हाल ही में आ रही हैं जो हिंसा का महिमामंडन कर रही हैं।'' 

मेरी बेटी ने रोते-रोते बीच में छोड़ी फिल्म
रंजीत रंजन ने बताया कि उनकी बेटी और उसके दोस्त ने एनिमल फिल्म में हिंसा को देखकर रोते-रोते बीच में ही सिनेमा हॉल छोड़ा। उसने बाद में बताया कि फिल्म में अत्यधिक हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बातें हैं।  उन्होंने कहा, “लोग, समाज और बॉलीवुड इसे उचित ठहराते दिख रहे हैं…यह डरावना है। उदाहरण के लिए, फिल्म 'कबीर सिंह' में मुख्य अभिनेता अपनी पत्नी के साथ कैसा व्यवहार करता है, और अब देखें कि 'एनिमल' में एक्टर अपनी पत्नी के साथ कैसा व्यवहार करता है। वे अपनी फिल्मों के माध्यम से इस हिंसा को उचित ठहरा रहे हैं।”

महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा
रंजन ने यह भी कहा कि देश में कई युवा इन पुरुषों को हीरो और रोल मॉडल मानने लगे हैं, जिसके कारण हम समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसक घटनाओं में वृद्धि देख रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि का खुलासा हुआ है। 2022 में 4,45,256 मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों से पता लगता है कि देश में हर घंटे 51 एफआईआर दर्ज की गई।

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