नेहरू के समय पड़ी थी भारत-रूस संबंधों की बुनियाद : कांग्रेस
कांग्रेस ने भारत-रूस संबंधों को विकास यात्रा का अहम हिस्सा बताया है। जयराम रमेश के अनुसार, यह संबंध नेहरू के कार्यकाल से मजबूत हुए और सोवियत संघ ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कहते हैं कि 1991 के बाद ठहराव आया, लेकिन 1998 के बाद फिर से गति मिली।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। कांग्रेस ने भारत-रूस संबंधों को देश की विकास यात्रा का अहम हिस्सा करार दिया है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तमाम प्रचार के बावजूद हकीकत बरकरार है। सच्चाई यह है कि दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में पड़ी थी और 1950 से 1980 के दशक के बीच दोनों देशों की दोस्ती और मजबूत हुई। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह बात ऐसे समय कही, जब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक हो रही थी। उन्होंने कहा कि सोवियत संघ 1950 के दशक में शुरू हुई भारत की विकास यात्रा में एक अमूल्य साझेदार रहा है। रूस ने इस्पात, बिजली, तेल एवं गैस, रक्षा, अंतरिक्ष तथा परमाणु क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत-रूस संबंधों का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि यह सहयोग जुलाई 1955 में नेहरू की सोवियत संघ की 16 दिवसीय यात्रा और उसके बाद नवंबर-दिसंबर 1955 में सोवियत नेताओं निकोलाई बुल्गानिन तथा निकिता ख्रुश्चेव की 20 दिवसीय भारत यात्रा के बाद और मजबूत हुआ। उन्होंने भारत और सोवियत संघ के बीच 1971 में हुए समझौते का भी उल्लेख किया।
1991 के बाद संबंधों में ठहराव
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत-रूस संबंधों में कुछ समय के लिए ठहराव आया, लेकिन 1998 में तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव और उसके बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल की संयुक्त परियोजना करीब सात साल की प्रक्रिया के बाद पुतिन और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अंतिम रूप ले सकी। बाद में इसका विस्तार किया गया।


