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पैसे से भी कमजोर हो गई कांग्रेस, डोनेशन में 17 फीसदी की कमी; एक ही कंपनी ने दिया आधा चंदा

चुनाव आयोग को दिए रिकॉर्ड के मुताबिक इलेक्टोरल बॉन्ड के अलावा मिलने वाले डोनेशन में भी कांग्रेस कमजोर हो रही है। इसे कोलकाता की एक हीकंपनी ने आधे से ज्यादा चंदा दिया है।

पैसे से भी कमजोर हो गई कांग्रेस, डोनेशन में 17 फीसदी की कमी; एक ही कंपनी ने दिया आधा चंदा
Ankit Ojhaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीTue, 05 Dec 2023 06:57 PM
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कांग्रेस के तीन राज्यों में भाजपा के सामने हार का सामना करना पड़ा है। इस तरह से हार का असर पार्टी के फंड पर भी पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में कांग्रेस का डोनेशन 17 फीसदी कम हुआ है। वहीं 2023 में कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड के अलावा 79.9 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। गौर करने वाली बात यह है कि इसमें से आधा कोलकाता की एक स्टील कंपनी ने दिया है। इसका नाम एमकेजे एंटरप्राइजेज है। यह कंपनी कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है और इसने पांच डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 45 करोड़ रुपये दिए हैं। 

बता दें कि एक साल में कांग्रेस को 95.45 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। वहीं भाजपा को नॉन इलेक्टोरल बॉन्ड डोनेन 719.85 करोड़ रुपये मिला है। 2022 से 2023 के बीच भाजपा के चंदे में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह कांग्रेस से 9 गुना ज्यादा है। भाजपा को वित्त वर्ष 2022 में 614 करोड़ रुपये मिले थे।

देश की 6 राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा का चंदा सबसे ज्यादा है। आम आदमी पार्टी को इस वित्त वर्ष में 37.1 करोड़ का चंदा मिलाष वहीं नेशनल पीपल्स पार्टी को 7.47 करोड़ और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को 6.02 करोड़ रुपये का दान मिला। बहुजन समाज पार्टी के मुताबिक उसे 20 हजार रुपये से ज्यादा का चंदा किसी एक यूनिट से नहीं मिला है।  बीएसपी 2001 से राष्ट्रीय पार्टी है। 

रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल ऐक्ट के तहत सभी राजनीतिक दलों को हर साल नॉन इलेक्टोरल बॉन्ड से मिले चंदे का ब्यौरा देना होता है। इसमें 20 हजार से ज्यादा का वह चंदा शामिल होता है जो चेक, बैंक ट्रांसफर, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन या यूपीआई से मिलता है। 

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