कांग्रेस का चढ़ावा चोरी प्रकरण के खिलाफ हनुमान चालीसा पाठ
हल्द्वानी में कांग्रेस ने राम जन्मभूमि मंदिर और बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई। विधायक सुमित हृदयेश की अगुवाई में हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्टी ने चार प्रमुख मांगें रखी, जिनमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता शामिल है।

हल्द्वानी। यूपी में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मंगलवार को हल्द्वानी से भी विरोध की आवाज उठी। महानगर कांग्रेस कमेटी ने हीरानगर स्थित गोल्ज्यू मंदिर में विधायक सुमित हृदयेश के नेतृत्व में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की। कार्यक्रम में विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के सबसे बड़े केंद्र हैं। यदि चढ़ावे में कथित गड़बड़ी हुई है तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
मुख्य आरोप
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही से ही श्रद्धालुओं का विश्वास बना रह सकता है। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रार्थना और मांगें
हनुमान चालीसा पाठ के बाद कार्यकर्ताओं ने भगवान हनुमान से धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा तथा दोषियों को दंड मिलने की प्रार्थना की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की शंका सरकार और व्यवस्था, दोनों की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। इसलिए जांच में देरी या अस्पष्टता से बचते हुए सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए।
इस मौके पर पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगड़वाल, हरीश मेहता, एनबी गुणवंत, राजेंद्र बिष्ट (रज्जी), शैलेन्द्र दानू, हेम पांडे, मलय बिष्ट, किरण माहरा, मधु सांगूड़ी, जया कर्नाटक, धर्मवीर, गौरव कर्नाटक सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने उठाईं चार प्रमुख मांगें
1- राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम के कथित चढ़ावा प्रकरण की समयबद्ध व निष्पक्ष जांच।
2- दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई।
3- धार्मिक संस्थानों में चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
4- आस्था से जुड़े मामलों में सरकार तथ्य सार्वजनिक कर श्रद्धालुओं का भरोसा बहाल करे।


