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हिंदी न्यूज़ देशOBC और SC/ST को लुभाने कांग्रेस ने बदली रणनीति, इन दो मुद्दों को बनाया हथियार; समझें- सियासी मायने

OBC और SC/ST को लुभाने कांग्रेस ने बदली रणनीति, इन दो मुद्दों को बनाया हथियार; समझें- सियासी मायने

केंद्र सरकार जातीय जनगणना के पक्ष में नहीं है, जबकि कई विपक्षी पार्टियां जो कांग्रेस की सहयोगी भी हैं,जातीय जनगणना की पक्षधर हैं। बिहार की नीतीश सरकार, जिसमें कांग्रेस शामिल है, जातीय गणना करा रही है।

OBC और SC/ST को लुभाने कांग्रेस ने बदली रणनीति, इन दो मुद्दों को बनाया हथियार; समझें- सियासी मायने
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 03 Dec 2022 07:11 PM

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7 दिसंबर यानी आगामी बुधवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। इसके मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने के लिए बेरोजगारी, महंगाई, चीन सीमा मामला समेत ईडब्ल्यूएस आरक्षण और जातीय जनगणना का भी मुद्दा उठाने की बात कही है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज जयराम रमेश ने कहा है कि कांग्रेस जातिगत जनगणना के पक्ष में है, इसे कराना जरूरी है। उन्होंने EWS आरक्षण को भी शीतकालीन सत्र में संसद में उठाने और उस पर चर्चा कराने की बात कही है। रमेश ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट के 3 न्यायाधीश संशोधन पर सहमत हुए और दो जजों ने इस पर सवाल उठाए हैं, तो कांग्रेस इस पर संसद में पुनर्विचार की मांग करेगी और संसद में बहस कराना चाहेगी।

बता दें कि केंद्र सरकार जातीय जनगणना के पक्ष में नहीं है, जबकि कई विपक्षी पार्टियां जो कांग्रेस की सहयोगी भी हैं, जातीय जनगणना की पक्षधर हैं। बिहार की नीतीश सरकार, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, जातीय जनगणना करवा रही है। झारखंड सरकार, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, भी जातीय जनगणना के पक्ष में है.

यानी वैसी राजनीतिक पार्टियां जनका वोट बैंक ओबीसी जातियां और दलित जातियां हैं, वे जातीय जनगणना के पक्ष में हैं। इनमें से कई दल आर्थिक आधार पर सवर्ण आरक्षण के भी विरोधी रहे हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने हालिया के अपने फैसले में EWS आरक्षण पर तीन-दो के बहुमत से फैसला दिया है और उसके खिलाफ अपील दायर हो चुकी है, तब कांग्रेस ने उस पर अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए फिर से उस पर संसद में चर्चा कराने की मांग की है।

दरअसल, ऐसा कर कांग्रेस उस ओबीसी और एससी-एसटी वोट बैंक से खुद को कनेक्ट करना चाह रही है, जो उससे छिटक चुका है और मौजूदा समय में उसका बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब तक ओबीसी वोट बैंक का बीजेपी से मोहभंग नहीं होता, तब तक उसकी जीत का कारवां चलता ही रहेगा।

इसी दिशा में काम करते हुए कई विपक्षी दलों की सरकारों ने अपने राज्यों में आरक्षण की सीमा भी बढ़ाई है, ताकि ओबीसी और दलित वोट बैंका साथ पाया जा सके और बीजेपी को उनके हितों के खिलाफ ठहराया सके। संसद में इन मुद्दों को उठाकर कांग्रेस 2024 के आम चुनावों से पहले देशभर में इस तरह का माहौल बनाने की कोशिशों में जुटी है।