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शरिया को मानती है कांग्रेस; किस बात पर भड़की भाजपा, फिर उठा शहबानो केस का जिक्र

भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए विवादास्पद शाहबानो मामले का हवाला दिया और कहा कि राजीव गांधी सरकार ने संविधान के ऊपर शरिया को प्राथमिकता दी थी।

शरिया को मानती है कांग्रेस; किस बात पर भड़की भाजपा, फिर उठा शहबानो केस का जिक्र
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 10 Jul 2024 07:46 PM
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार को दिए निर्णय को लेकर भाजपा ने एक बार फिर कांग्रेस को घेरा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया निर्णय में बताया कि मुस्लिम महिलाएं तलाक के बाद अपने पति से गुजारा-भत्ता मांगने की हकदार हैं। इस फैसले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए विवादास्पद शाहबानो मामले का हवाला दिया और कहा कि राजीव गांधी सरकार ने संविधान के ऊपर शरिया को प्राथमिकता दी थी।

उल्लेखनीय है 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के बाद शाहबानो की पति से गुजारा भत्ता मांगने की याचिका मंजूर कर ली थी। हालांकि, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस फैसले को पलटने के लिए संसद में कानून पारित कर दिया। भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आज कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक को समाप्त कर दिया है।

कांग्रेस की सत्ता में संविधार खतरे में रहा: भाजपा
उन्होंने कहा, "जब भी कांग्रेस सत्ता में रही है, संविधान खतरे में रहा है। यह (राजीव गांधी सरकार का) ऐसा फैसला था जिसने संविधान पर शरिया को प्राथमिकता दी। कांग्रेस सरकार के दौरान संविधान की जो प्रतिष्ठा कुचली गई थी, उसे इस आदेश ने बहाल किया है। इस फैसले ने संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक को खत्म कर दिया है।"

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को धर्म के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समान अधिकारों का मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा कोई धर्मनिरपेक्ष राज्य नहीं है जहां हलाला, तीन तलाक और हज सब्सिडी जैसे शरिया प्रावधानों की अनुमति हो। त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने भारत को आंशिक इस्लामिक राज्य में बदल दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से गुजारा-भत्ता की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि यह नियम सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 धर्मनिरपेक्ष कानून पर हावी नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गुजारा-भत्ता कोई दान नहीं है, बल्कि यह सभी विवाहित महिलाओं का अधिकार है।