नकारात्मक सोच से आत्महत्या का बढ़ रहा ग्राफ
युवाओं से लेकर उम्रदराज उठा रहे घातक कदम सकारात्मक विचारों से आएगी आत्महत्या के मामलों में कमी

श्रीनगर, संवाददाता। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की गई। आत्महत्या के कारणों पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने कहा कि सकारात्मक सोच से आत्महत्या के मामलों में कमी आएगी। इस मौके पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में स्थान हासिल करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। शनिवार को कस्बा में स्थित बुंदेलखंड महाविद्यालय में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य विश्वनाथ ने कार्यक्रम का शुभारंभ कराते हुए कहा कि आज के समय में लोग नकारात्मक विचारों से ग्रसित होकर आत्महत्या जैसे घातक कदम उठा रहे है। किशोरों से लेकर युवाओं और बुजुर्ग आत्महत्या कर जीवन समाप्त कर रहे है।
मनोचिकित्सकी समाजिक कार्यकर्ता प्रेमदास ने कहा कि अवसाद, नशे की लत, पढ़ाई में मन न लगना, मन में हमेशा विकार रहना और नकारात्मक सोच से आत्महत्या की प्रवत्ति बढ़ती है। इस मौके पर नैदानिक मनोवैज्ञानिक अंकिता गुप्ता ने कहा कि निराशा और हताशा को दूर करने के लिए पीडित की काउंसलिंग करानी चाहिए। ऐसे लोगों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। जिला अस्पताल में मन कक्ष में काउंसलिंग कर उपचार किया जाता है। इस मौके पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रवक्ता राजकुमार, पवन कुमार, सौरभ कुमार सहित अन्य कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे।


