एनसीपी (एसपी) के रुख से इंडिया गठबंधन की बढ़ीं धड़कनें
महाराष्ट्र में ऑल इंडिया पार्टी नेतृत्व की बैठकों के बाद 'इंडिया गठबंधन' की चिंताएँ बढ़ गई हैं। एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार की महायुति नेताओं से मुलाकात से घटक दलों में अनिश्चितता बढ़ी। सुप्रिया सुले ने दावा किया कि यह बैठक राजनीतिक नहीं थी, लेकिन परिसीमन विधेयक पर रुख ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। महाराष्ट्र में चल रही मुलाकातों और बैठकों के दौर ने ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’(इंडिया गठबंधन) की चिंता बढ़ा दी है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में सांसदों की टूट के बाद अब एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार की महायुति के नेताओं से मुलाकात से घटक दलों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने पार्टी नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद लगाए जा रहे कयासों को बुधवार को खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह बैठक सियासी राजनीति का हिस्सा नहीं थी। पर परिसीमन विधेयक पर एनसीपी की राय पर इंडिया गठबंधन की उलझन बढ़ गई है।
विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि परिसीमन विधेयक पर अभी इंडिया गठबंधन के घटकदलों के बीच कोई चर्चा नहीं हुई है। ऐसे में एनसीपी का यह कहना है कि सरकार राज्यों में लोकसभा व विधानसभा सीट की संख्या 50 फीसदी तक बढ़ाने के लिए बिल में संशोधन करती है, तो एनसीपी (एसपी) चर्चा के लिए तैयार है।ऐसे में एनसीपी (एसपी) के रुख से घटक दलों की चिंता बढ़नी स्वभाविक है। क्योंकि, एनपीसी (एसपी) के लोकसभा में आठ और राज्यसभा में एक सांसद हैं। पार्टी नेता मानते हैं कि शरद पवार की पार्टी के सदन में संख्या बल से अधिक अहम उनका साथ होना है। हालांकि, एनसीपी (एसपी) ने दोहराया है कि वह इंडिया गठबंधन के साथ है। रणनीतिकार मानते हैं कि परिसीमन विधेयक में संशोधन की शर्त पर शरद पवार समर्थन करते है, तो इससे विपक्ष के विरोध की धार कमजोर होगी। वह मानते हैं कि एनसीपी (एसपी) को घटक दलों के चर्चा के बाद इस मुद्दे पर कोई बात कहनी चाहिए थी। क्योंकि, इससे घटक दलों के बीच तालमेल को झटका लग सकता है।
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