अपर थानाध्यक्षों को कम्युनिटी पुलिसिंग की जिम्मेदारी, थानों में सामुदायिक पंजी
सामुदायिक सहभागिता से अपराध होने से पहले रोकने की कोशिश , पुलिस और आम जनता के बीच तालमेल बेहतर बनाने को लेकर थानों में तैनात अपर थानाध्यक्षों को कम्युनिटी पुलिसिंग की अहम जिम्मेदारी दी गयी है।

सामुदायिक सहभागिता से अपराध होने से पहले रोकने की कोशिश बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ युवाओं को नशे से बचाने पर रहेगा जोर दिवानी और आपराधिक मामलों में सरपंच-पंचों को प्रदत्त शक्तियों में मदद की पहल आरा। हिन्दुस्तान संवाददाता पुलिस और आम जनता के बीच तालमेल बेहतर बनाने को लेकर थानों में तैनात अपर थानाध्यक्षों को कम्युनिटी पुलिसिंग की अहम जिम्मेदारी दी गयी है। सभी अपर थानाध्यक्षों को थाने का कम्यूनिटी अधिकारी बनाया गया है। साथ ही सभी थानों में सामुदायिक पंजी भी संधारित की जा रही है। इसमें हर महीने सामुदायिक पुलिसिंग को लेकर किये जाने वाले कार्यों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। कम्युनिटी पुलिसिंग का मुख्य उद्देश्य पुलिस और पब्लिक के बीच की दूरी को कम करना, पुलिस की उपस्थिति को बढ़ाना, आम जन की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने के साथ सामुदायिक सहभागिता के जरिए अपराध होने से पहले रोकना है। अपर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय सुनील ने सोमवार को यह जानकारी दी। भोजपुर में भी कम्युनिटी पुलिसिंग शुरू हो गयी है। पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित की ओर इसकी पुष्टि की गयी है।
सुरक्षा के लिए योजनाएँ
पुलिस मुख्यालय के अनुसार सामुदायिक पुलिसिंग के तहत बीट पुलिसिंग को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, बचाव एवं सहयोग से संबंधित हर तरह के कार्य किए जायेंगे। युवाओं को अपराध एवं नशे से दूर रहने को लेकर जागरूक किया जाएगा। बाल सुरक्षा को लेकर विद्यालय और महाविद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। दिवानी और आपराधिक मामले में पंचायती राज खासकर सरपंच एवं पंचों को प्रदत्त शक्तियों में पुलिस की ओर से भी मदद की जायेगी। साइबर क्राइम से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सामुदायिक पुलिसिंग का मुख्य उद्देश्य: विश्वास बढ़ाना: पुलिस और जनता के बीच की दूरी को मिटाना और आपसी सहयोग व विश्वास स्थापित करना। अपराध की रोकथाम: अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, सामुदायिक सहभागिता से अपराध को होने से पहले ही रोकना। जन भागीदारी: स्थानीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्णयों में नागरिकों को शामिल करना। समस्या का समाधान: स्थानीय स्तर पर अपराध के मूल कारणों की पहचान करना और मिलकर उनका समाधान खोजना। जीवन स्तर में सुधार: क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल बनाकर नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और कल्याण में सुधार करना。


