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Lok Sabha Elections: पश्चिम बंगाल में जिताऊ सीटों पर कांग्रेस का साथ देगा वामदल

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Lok Sabha Elections 2019: पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा जिन राज्यों में सर्वाधिक बढ़ने की उम्मीद कर रही है उनमें पश्चिम बंगाल प्रमुख है। वहां भाजपा को रोकने के लिए अभी तक विरोधी दल एकजुट नहीं हो पाए हैं।
 

तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित कर साफ कर दिया है कि वह अकेले मैदान में उतर रही है। वाम मोर्चे और कांग्रेस के बीच बातचीत की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, लेकिन इसके सफल होने के आसार कम हैं। इसके मद्देनजर वाम मोर्चे ने प्लान बी भी तैयार रखा है। यदि कांग्रेस से गठबंधन नहीं होता है तो भी वह भाजपा और तृणमूल को हराने के विकल्पों पर काम करेगा।
 

लंबे समय से गठजोड़ पर चर्चा
वामदलों और कांग्रेस में लंबे समय से गठबंधन की चर्चा चल रही है। लेकिन कांग्रेस की राज्य इकाई इसके लिए तैयार नहीं थी। जबकि वामदल शुरू से प्रयासरत हैं। वह तृणमूल कांग्रेस को हराने के साथ-साथ भाजपा को भी रोकने के इच्छुक हैं, लेकिन सीटों को लेकर कांग्रेस के साथ वामदलों का तालमेल नहीं बन पा रहा है। पहले मुर्शिदाबाद और रायगंज सीटों पर मुश्किल थी। माकपा की इन जीती सीटों को कांग्रेस मांग रही थी, लेकिन कांग्रेस इन पर अब दावा छोड़ चुकी है। अब कांग्रेस पुरुलिया और बरासत सीटों को लेकर वाम दलों को असहज कर दिया है। इन सीटों को भाकपा और फारवर्ड ब्लॉक नहीं देना चाहते।

 

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चारों वामदल मामले में जल्द करेंगे फैसला
सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस के साथ कोई औपचारिक गठबंधन होता है या नहीं। चारों वामदल मिलकर जल्द यह फैसला करेंगे।

 

प्लान बी के तहत काम करेंगे
सूत्रों का कहना है कि यदि गठबंधन नहीं होता है तब भी वामदल अपने प्लान बी के तहत कार्य करेंगे ताकि भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को हराया जा सके। जहां-जहां उन्हें कांग्रेस या कोई अन्य उम्मीदवार भाजपा और तृणमूल को हराने की स्थिति में दिखेगा, वहां वे अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे तथा उसका समर्थन करेंगे।

 

पश्चिम बंगाल में पिछले लोकसभा चुनाव में वामदल हालांकि दो ही सीटें जीतने में कामयाब रहे थे। लेकिन उनका वोट प्रतिशत लगभग 30 फीसदी था। जबकि 34 सीट जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस को 39 फीसदी मत मिले थे। 10 फीसदी मत पाकर कांग्रेस पार्टी ने चार और 17 फीसदी मत लेकर भारतीय जनता पार्टी ने दो सीटें जीती थी। इसके बाद 2016 में जब विधानसभा चुनाव हुए थे तो उसमें तृणमूल का मत प्रतिशत बढ़ा था। उसे करीब 45 फीसदी, वामदलों को 26, कांग्रेस को 12 तथा भाजपा को 10 फीसदी वोट मिले थे। लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में मतों का रुझान अलग-अलग होता है। इसलिए 2014 के मतों को देखें तो कांग्रेस और वामदलों को तृणमूल से करीब एक फीसदी ज्यादा मत मिले थे।
 

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  • Web Title:Communist Party will support Congress in winning seat in West Bengal in upcoming Lok Sabha Elections