आश्रित नियोजन के लिए कोल कंपनियों में शुरू होगा हेल्प डेस्क
कोल इंडिया ने कोयला वेतन समझौते के तहत आश्रितों के रोजगार और मासिक मौद्रिक मुआवजे के मामलों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। सभी अनुषंगी कंपनियों के क्षेत्रीय ऑफिस में सहायता केंद्र खोले जाएंगे, जहां दावों को ऑनलाइन देखा जाएगा। इसके साथ ही मृत्यु की सूचना देने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

कोल इंडिया ने कोयला वेतन समझौता के तहत आश्रितों के रोजगार और मासिक मौद्रिक मुआवसा के मामलों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों के क्षेत्रीय कार्यालय और स्वतंत्र स्थान पर सहायता केंद्र खोला जाएगा, जहां नौकरी के दावे को स्वतंत्र रूप से देखा जाएगा। अनुषंगी कंपनियों के निदेशक मानव संसाधन सहायता केंद्र की व्यवस्था देंगे। एसओपी जारी होने के सात दिनों के अंदर यह व्यवस्था करनी है। पोर्टल के माध्यम से दावे अपलोड किए जाएंगे। यानी व्यवस्था ऑनलाइन होगी। इससे नियोजन मिलने में आसानी होगी। तीन माह के अंदर आवेदनों की प्रोसेसिंग के लिए पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसका एक्ससे हेल्प डेस्क को मिलेगा। कंपनी अस्पताल में मौत होने पर अस्पताल के अधिकारी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के तीन दिन के अंदर मृत्यु की सूचना सहायता केंद्र को ईमेल से देंगे। कंपनी अस्पताल के अधिकार क्षेत्र के बाहर मृत्यु होने पर आश्रित को सक्षम पदाधिकारी से निर्गत मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ सूचित करना होगा। कोयला कर्मी की मृत्यु होने के बाद क्लेम से लेकर हर कार्य के लिए समय सीमा तय की गई है। आवश्यक दस्तावेज के साथ क्लेम के बाद इससे आसानी से नियोजन मिल सकेगा।
आश्रित की उम्र की गणना
आश्रित की उम्र की गणना पूर्व कर्मचारी के मृत्यु की तारीख से होगी ताकि न्यूनतम आयु सीमा (18वर्ष/12 वर्ष) और अधिकतम आयु सीमा (35वर्ष/45 वर्ष) के मानदंड़ों को पूरा किया जा सके। बेटे की जगह विधवा बहू को नियोजन दिया जा सकता है, बशर्ते वह आश्रित नियोजन की शर्तें पूरी करती हों। आवेदन में बताई गई आवेदन की तिथि को ही क्लेम की तारीख माना जाएगा। एसओपी में पूर्व की कई शर्तों में ढील दी गई है। 40 पेज के एसओपी में विभिन्न आवेदन फॉर्म के साथ विस्तार में प्रक्रिया की जानकारी दी गई है।
नौकरी की जगह मासिक मुआवजा के लिए मनाएं
एसओपी में जिक्र है कि आश्रित को नौकरी की जगह मासिक मुआवजा के लिए मनाएं। इसका रिकार्ड भी उपलब्ध कराना है। नियोजन की जगह मासिक मौद्रिक मुआवजा पर जोर पर एक्सपर्ट कहते हैं कि आश्रित नियोजन मामले में कोल कंपनियों कुशल मेनपावर नहीं मिलता। इसलिए एसओपी में नौकरी की जगह मासिक मौद्रकि मुआवजा पर जोर दिया गया है।


