Climate Trend Report Pollution Deadly Layer 7 States 47 Crore Population Under Threat - चिंताजनक : प्रदूषण की घातक परत से 7 राज्यों की करीब 47 करोड़ की आबादी खतरे में DA Image
6 दिसंबर, 2019|4:13|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चिंताजनक : प्रदूषण की घातक परत से 7 राज्यों की करीब 47 करोड़ की आबादी खतरे में

delhi air quality remains in severe zone  respite likely tomorrow

प्रदूषण की समस्या से सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) ही नहीं जूझ रहा है, बल्कि गंगा-सिंधु नदियों का संपूर्ण मैदानी क्षेत्र इसकी चपेट में है। क्लाईमेट ट्रेंड द्वारा सोमवार (18 नवंबर) को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण की घातक परत के कारण सात राज्यों की करीब 47 करोड़ की आबादी खतरे में है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल से लेकर पंजाब तक सिंधु-गंगा मैदानी क्षेत्र एयरोसोल का बड़ा केंद्र बन गया है। ये एयरसोल प्राकृतिक भी हैं और मानव जनित भी। बड़ी मात्रा में रासायनिक रूपांतरण के जरिये भी पीएम 2.5 का निर्माण हो रहा है जो लंबे समय तक वायुमंडल में टिके रहते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार गंगा और सिंधु के मैदानों में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल में छाई एयरोसोल की परत में कुदरती कण जैसे समुद्री लवण, धूल, कोहरा और प्राकृतिक सल्फेट हैं। जबकि मानवजनित कणों में कालिख, औद्यौगिक सल्फेट,ब्लैक कार्बन आदि शामिल हैं।

वैसे मानव जनित कणों की उत्पति हर क्षेत्र में अलग-अलग है जो उस क्षेत्र की गतिविधियों पर निर्भर है। लेकिन कुदरती कणों और मानव जनित कणों में रसायनिक रूपांतरण भी होता है। इस मौके पर आयोजित कार्यशाला में आईआईटी दिल्ली के सहायक प्रोफेसर सॉगनिक डे समेत कई विशेषज्ञों ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए प्रदूषण के स्रोतों को खत्म करना होगा और पूरे एयरशेड को लेकर क्षेत्रीय रणनीति बनानी होगी। लेकिन चिंता की बात यह है कि सरकार द्वारा बनाए गए राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम में कई प्रदूषित शहर नहीं हैं। इसके अलावा प्रदूषण के स्रोतों को खत्म करने के संसाधनों की कमी है। 

मैदानी क्षेत्र में 1-15 नवंबर के बीच शीर्ष 10 प्रदूषित शहर
गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, जींद, दिल्ली, हिसार, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, कानपुर

(पीएम 2.5 का स्तर 250-350 के बीच दर्ज किया गया)
पहले नौ शहरों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है। 

50% पीएम 2.5 के पीछे रासायनिक रूपांतरण
सर्दियों में करीब 50 फीसदी पीएम 2.5 रासायनिक प्रक्रिया से ही निर्मित होता है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा सल्फरडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, वोलाटाइल आर्गेनिक कंपाउंड (वीओसी) और पोलीसाइकिल एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) आदि के पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) में तब्दील होने के कारण होता है। 

मैदानी इलाकों से जल्दी नहीं निकलते प्रदूषक तत्व
रिपोर्ट में कहा गया है प्रदूषणकारी तत्व चाहे प्राकृतिक हों या मानवजनित, गंगा मैदानों में एक घाटीनुमा इलाके से बाहर नहीं निकलपाने के कारण पूरी सर्दियों के दौरान मैदानी इलाकों में जमे रहते हैं। सर्दी का मौसम शुरू होते ही बायोमास और अपशिष्ट के जलाने से ब्लैक कार्बन और कार्बनिक कण धुएं के रूप में निकलते हैं और गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। यह धुआं, वाहनों, कारखानों आदि से प्रदूषण के साथ मिलकर एक मोटी घातक धुंध बनाता है। 

प्रदूषण पर केंद्रित फिल्म महोत्सव 27 नवंबर से  
आगामी 10वें सीएमएस वातावरण फिल्म मोहत्सव में कुल 170 फिल्में और डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएंगी। इन फिल्मों में प्रदूषण विषय पर 90 लघु फिल्में हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से आयोजित यह फिल्म महोत्सव 27 नवंबर से डॉक्टर आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में शुरू होगा। यह सिर्फ सिनेमा कला का उत्सव मानने वाला महोत्सव नहीं है, बल्कि इसका मकसद फिल्म के माध्यम से प्रकृति के प्रति जागरुकता फैलाना है।  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Climate Trend Report Pollution Deadly Layer 7 States 47 Crore Population Under Threat