आर्कटिक की बर्फ पिघलने से मानसून पर सर्वाधिक प्रतिकूल असर

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

देश में जलवायु खतरा गंभीर रूप धारण कर सकता है। आर्कटिक में समुद्री बर्फ के पिघलने से मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे चरम मौसम की घटनाएँ बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2040 तक आर्कटिक की बर्फ समाप्त हो जाएगी, जिससे भारतीय मानसून और असामान्य मौसमी घटनाओं पर असर पड़ेगा।

आर्कटिक की बर्फ पिघलने से मानसून पर सर्वाधिक प्रतिकूल असर

देश में आने वाले दशकों में जलवायु खतरा कहीं ज्यादा गंभीर रूप धारण कर सकता है। सबसे ज्यादा खतरा मानसून के प्रभावित होने को लेकर व्यक्त किया जा रहा। हाल में आर्कटिक को लेकर संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2040 तक वहां गर्मियों में समुद्र की बर्फ खत्म हो जाएगी। इससे मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ चरम मौसमी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक में गर्मी बढ़ रही है। इससे वहां की बर्फ 13 फीसदी सालाना की रफ्तार से नष्ट हो रही। जमी बर्फ के पिघलने से कार्बन और मीर्थन उत्सर्जन भी बढ़ रहा जिससे तापमान वृद्धि होती है। नतीजा यह है कि यह स्थिति मौसमी धाराओं जेट स्ट्रीम के साथ-साथ वायुमंडलीय परिवर्तनों को भी प्रभावित कर रही है। आर्कटिक की समुद्री बर्फ और हिमालय तंत्र के बीच खासकर ग्रीष्मकालीन मानसून को लेकर गहरा संबंध है। आर्कटिक के कारा सागर में जब समुद्री बर्फ घटती है तो इससे आर्कटिक जल और उष्ण कटिबंधीय जल के बीच तापीय दबाव में कमी आती है। इससे महासागरीय धाराएं प्रभावित होती हैं जो दक्षिण पश्चिम मानसून को प्रभावित कर सकती है। इस पर कई अध्ययन हुए हैं तथा भारतीय वैज्ञानिकों ने नए अध्ययन भी शुरू किए हैं.

बिगड़ सकता है मौसम का मिजाज

रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक तापमान में वृद्धि, समुद्री बर्फ में कमी सीधे भारतीय मानसून पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इसमें चरम बारिश की घटनाएं, कहीं अत्यधिक बाढ़ और कई सूखे की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती हैं। वहीं सर्दियों के दौरान चरम सर्दी की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती है। गर्मी के मौसम में लू की घटनाएं तीव्र और व्यापक हो सकती हैं।

आर्कटिक में तेज हो सकता है नौवहन

रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक उत्तरी गोलार्द्ध के मौसम और जलवायु को प्रभावित करता है। अपेक्षाकृत अत्यधिक ठंडा यह क्षेत्र बाकी हिस्सों की जलवायु को मध्यम करने में मदद करता है, लेकिन जब यह क्षेत्र खुद ही गर्म हो जाएगा, वहां बर्फ ही खत्म हो जाएगी तो यह समूचा तंत्र ही बिगड़ जाएगा। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि 2040 में जब आर्कटिक की समुद्री बर्फ पिघल जाएगी तो वहां नौवहन में बढ़ोत्तरी होगी। खनिज एवं गैस का दोहन बढ़ सकता है। इससे आर्कटिक क्षेत्र के तापमान पर और भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

FAQs

✦आर्कटिक में बर्फ पिघलने का भारतीय मानसून पर क्या असर होगा?−
आर्कटिक में बर्फ पिघलने से भारतीय मानसून पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिसमें चरम बारिश, बाढ़, और सूखे की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती है।
Hindustan | Bureau

लेखक के बारे में

Hindustan | Bureau

हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव , Byelection 2026 Result Live और Navratri 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candidates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsIndia Newsआर्कटिक की बर्फ पिघलने से मानसून पर सर्वाधिक प्रतिकूल असर