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मैं कोई जादूगर नहीं, चुटकी बजा हल नहीं कर सकता सारी समस्याएं; पत्रकार से क्यों बोले CJI डी वाई चंद्रचूड़ 

सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्टरूम में जज कई बार वकीलों से जिरह के दौरान प्रश्न दर प्रश्न पूछते हैं ताकि स्पष्टता प्राप्त हो सके लेकिन अंतिम शब्द कहे जाने तक यह कोई अंतिम फैसला नहीं होता है।

मैं कोई जादूगर नहीं, चुटकी बजा हल नहीं कर सकता सारी समस्याएं; पत्रकार से क्यों बोले CJI डी वाई चंद्रचूड़ 
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 19 Nov 2023 07:57 AM
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देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ का कहना है कि वह कोई जादूगर नहीं हैं, जो चुटकी बजाकर देश या देशभर की अदालतों की सभी समस्याओं को हल कर दें। हालांकि, उन्होंने कहा कि सीजेआई का पदभार संभालने के बाद से उन्होंने वास्तव में अदालतों की पुरानी समस्याओं के समाधान की एक प्रक्रिया शुरू की है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में CJI ने कहा, "जिस दिन मैंने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, उसी दिन मैंने न्यायालय के सदस्यों, बार और यहां तक ​​कि वादियों से कहा कि मैं कोई जादूगर नहीं हूं जो न्यायालय की या देश की सभी समस्याओं को एक पल में हल कर सकता हूं।" बता दें कि बतौर सीजेआई उनका कार्यकाल एक साल पूरा हो चुका है।

CJI ने कहा,  "हालाँकि, अदालतों को प्रभावित करने वाली पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने की मेरे पास एक स्पष्ट योजना थी। इसलिए, पहला काम जो मैंने किया, वह था खंडपीठ के अपने सहकर्मियों से परामर्श करना और उनका दृष्टिकोण जानना। मैंने न्यायपालिका को प्रभावित करने वाले मुद्दों के समाधान के लिए एक कार्य योजना बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों, विद्वानों और शोधकर्ताओं की एक टीम भी गठित की। इन चर्चाओं से उभरे फोकस के कुछ प्रमुख क्षेत्र थे न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार करना, न केवल जजों बल्कि अदालत के कर्मचारियों की क्षमताओं को मजबूत करना और अदालत में लंबित मामलों को कम करना।"

सीजेआई ने कहा कि इनके अलावा, जिन दो क्षेत्रों में मैं व्यक्तिगत रूप से विश्वास करता हूं कि उनमें तेजी लाने की जरूरत है, वे हैं प्रौद्योगिकी को अपनाना और संवैधानिक मामलों की सुनवाई। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि पिछले एक साल में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के कामकाज में कई प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि न्यायिक पक्ष की बात करें तो एक साल में करीब 50,000 मामलों का निपटारा किया गया है, जो लगभग उसी अवधि में दायर किए गए मामलों की संख्या के बराबर है। 

सीजेआई ने कहा, "हमने सुनिश्चित किया है कि लंबित मामलों में बढ़ोत्तरी न हो। इस संबंध में एक और अहम बात यह है कि हमने महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई पूरी करने और केस को निपटाए जाने वाले मामलों की संख्या में वृद्धि की है और यह सुनिश्चित किया है कि कम से कम एक संविधान पीठ लगातार काम करे। ऐसा कर हमने कई सालों और दशकों से लंबित कई संवैधानिक मामलों का निपटारा किया है।" उन्होंने कहा कि आगे भी  यह जारी रहेगा क्योंकि कई मामले संविधान पीठ के सामने सुनवाई की कतार में हैं। 

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर सुधार लाते हुए हमने सुप्रीम कोर्ट में आईसीटी सक्षम न्यायालय स्थापित किए हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और ट्रांसक्रिप्शन टूल के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों, ट्रांसक्रिप्ट का सारांश, अनुवाद, अदालती परीक्षणों के लिए विशेष स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के निर्माण और प्रक्रिया स्वचालन पर सहयोग के लिए आईआईटी मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किया गया है। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "मुझे यह भी लगा कि न्यायालय ज्ञान और अवसरों तक पहुंच को समान बनाने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, हमने ई-एससीआर लॉन्च किया जो एक स्वतंत्र और ओपन-सोर्स इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस है जिसमें 34,000 से अधिक निर्णय शामिल हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों और शोधकर्ताओं को अदालती फैसले तक पहुंचने के लिए किसी तरह का कोई भुगतान न करना पड़े।" उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जनजाति के छात्रों को इंटर्नशिप प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के साथ एक इंटर्नशिप योजना को भी अंतिम रूप दिया है। 

सीजेआई ने कहा कि न्यायालय को शारीरिक और बौद्धिक रूप से अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हमने लिंग रूढ़िवादिता पर एक हैंडबुक प्रकाशित की, सुप्रीम कोर्ट में लिंग तटस्थ शौचालय का निर्माण किया, और अब सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक कैफे ('मिट्टी कैफे') है जो पूरी तरह से विकलांग व्यक्तियों द्वारा चलाया जाता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार, अदालतों को अधिक सुलभ बनाने और न्याय वितरण सुनिश्चित करने  की परियोजनाओं पर सरकार के साथ लगातार काम कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने न्यायपालिका के काम पर बहुत अधिक ध्यान आकर्षित किया है। विशेष रूप से, कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग से अदालत कक्षों के अंदर क्या होता है और न्यायाधीश क्या करते हैं, इसका व्यापक असर पड़ा है।  सीजेआई ने कहा , "न्यायाधीशों द्वारा दिए गए बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से रिपोर्ट किए जाते हैं। इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। लोग अब जानने लगे हैं कि अदालती कार्यवाही में क्या हो रहा है, यह नई जानकारी लोगों को मौखिक बहस के दौरान न्यायाधीशों द्वारा दिए गए बयानों को चुनिंदा तरीके से लेने या उसे रिपोर्ट करने की भी अनुमति देती है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि अदालती कार्यवाही पर रिपोर्ट करने का यह सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश अक्सर तथ्यों और कानूनी व्याख्या पर स्पष्टता पाने के लिए प्रश्न दर प्रश्न पूछते हैं लेकिन वे उनके अंतिम निष्कर्ष नहीं होते हैं। अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारों को इन वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

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