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27 जनवरी, 2020|5:55|IST

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नागरिकता विधेयक पर आशंकाएं दूर करना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

citizenship bill

नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो जाता है तो इसे अमल में लाने के लिए सरकार को कई तरह की चुनौतियों से दो चार होना पड़ेगा। केंद्रीय स्तर पर बहस भले ही हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण, भेदभाव के तौर पर देखी जा रही हो लेकिन राज्यों में मसला स्थानीय व आदिवासी व अन्य विशिष्ट समुदायों की पहचान और वहां के संसाधनों पर हक से जुड़ा है।  स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा भी राज्यों के सामने चुनौती है।

स्थानीय डेमोग्राफी में बाहरी लोगों के दबदबा होने से बदलाव की आशंका भी बिल का विरोध कर रहे लोगों की ओर से जताई जा रही है। केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में इन्हीं आशंकाओं को रोकने के लिए व्यापक जागरुकता अभियान शुरू किया है। राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि स्थनीय लोगों की चिंता दूर करने के लिए सही पक्ष प्रस्तुत करें।

जमीन पर कब्जे की आशंका ठीक नहीं : केंद्र की ओर से यह बताया जा रहा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक का बोझ किसी एक राज्य को नहीं सहना पड़ेगा। झूठ बनाम वास्तविकता के तहत बिंदुवार जानकारी केंद्र की ओर से दी जा रही है। सरकार ने नागरिक संशोधन बिल के जरिए हिंदू बंगाली लोगों द्वारा जनजातीय समूहों की जमीन हथियाने की आशंका को खारिज करते हुए इसे झूठ बताया है। सरकार का कहना है कि हिंदू बंगाली जनसंख्या मुख्य रूप से असम की बराक घाटी में रह रही है जो कि आदिवासी क्षेत्र से दूर है। 

कई मुद्दों पर अब भी कश्मकश
गृहमंत्रालय ने यह भी तर्क दिया है कि बिल उस स्थान पर लागू नहीं होगा जहां आदिवासियों के जमीन का संरक्षण संबंधी अधिनियम लागू है। इनर लाइन परमिट वाले इलाकों और छठीं अनुसूची वाले इलाकों में भी विधेयक के प्रावधान लागू नहीं होंगे। गृहमंत्री अमित शाह ने इसे लोकसभा में भी स्पष्ट किया था। कट आफ डेट को लेकर भी आशंकाओं का समधान करने की कोशिश गृहमंत्रालय कर रहा है। लेकिन स्थानीय समूह इसे अदालत में चुनौती देने का मन बना रहे हैं।

पहचान का भरोसा
सरकार ने बांग्लाभाषी लोगों के प्रभुत्व बढ़ने की आशंका को भी खारिज करते हुए कहा है कि हिंदू बंगाली जनसंख्या के अधिकांश लोग असम की बराक घाटी में हैं और यहां बंगाली भाषा को राज्य की दूसरी भाषा का दर्जा दिया गया है।

अब कम उत्पीड़न
बिल से एक आशंका यह भी जताई जा रही है कि इससे बांग्लादेश से हिंदुओं का पलायन और बढ़ जाएगा। सरकार का कहना है कि बांग्लादेश से अधिकांश अल्पसंख्यक पहले ही व्विस्थापित हो चुके हैं। सरकार का तर्क है कि  उत्पीड़न का स्तर पिछले कुछ सालों में घटा है। 

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  • Web Title:citizenship amendment bill worries Key Challenge For Centre