पुरुषार्थ से व्यक्ति जीवन को सार्थक बना सकता है : स्वामी मित्रानंद
चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर 35 हजार किमी की अखिल भारतीय अमृत यात्रा प्रयागराज पहुँची। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर में मुख्य कार्यक्रम हुआ, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्ज्वलन किया गया। कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें शास्त्रीय नृत्य और गीता के श्लोक शामिल थे।
चिन्मय मिशन के गौरवशाली 75 वर्ष पूरा होने पर गुरुवार को 35 हजार किमी की अखिल भारतीय अमृत यात्रा प्रयागराज पहुंची। यात्रा का केंद्र बिंदु महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर विद्यालय बना। मुख्य कार्यक्रम इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में अमृतांजलि के रूप में आयोजित हुआ। यात्रा संयोजक स्वामी मित्रानंद व स्वामी अभेदानंद ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्जवलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। चिन्मय नवीन सेवाश्रम न्यास व विद्यालय समूह की सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता ने गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद का स्मरण करते हुए मिशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। स्वामी मित्रानंद ने कहा कि यात्री चरैवेति के माध्यम से वेदांत के इस सूत्र को स्पष्ट करते हुए कहा कि जीवन की विषम परिस्थितियां, अवरोध व असफलताएं व्यक्ति की परीक्षा लेती हैं लेकिन उसे अपने ध्येय-पथ से विचलित नहीं होना चाहिए।
निरंतर प्रयास व पुरुषार्थ से ही व्यक्ति अपनी अंतर्निहित क्षमताओं का विकास कर सकता है और जीवन को सार्थक बना सकता है। विद्यालय के बाल कलाकारों ने मधुराष्टकम् पर शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति की तो छात्र-छात्राओं ने श्रीमद्भागवगीता के पांच श्लोकों का गायन का सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यात्रा को पहुंची विजडम ऑन व्हीलस प्रदर्शनी बस सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। बस में स्वामी चिन्मयानंद की चरण पादुका व प्रतिमा रखी हुई थी। इस मौके पर ब्रह्मचारी सुधीर चैतन्य, ब्रह्मचारिणी तारिणी चैतन्य, विद्यालय समूह की कोषाध्यक्ष रवींद्र गुप्त, निदेशक यशोवर्धन गुप्त, रेखा वैद्य आदि मौजूद रहे।


