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'चरवाहों को परेशान कर रहे चीनी सैनिक, वे अकेले निपटने को मजबूर'; केंद्र सरकार पर भड़की कांग्रेस

जयराम रमेश ने कहा, 'हाल ही में चुशुल सेक्टर में जाने से चरवाहों को रोकने और उन्हें परेशान करते हुए चीनी सैनिकों का वीडियो सामने आया था। इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने बेहद हल्की प्रतिक्रिया दी है।'

'चरवाहों को परेशान कर रहे चीनी सैनिक, वे अकेले निपटने को मजबूर'; केंद्र सरकार पर भड़की कांग्रेस
Niteesh Kumarएजेंसी,नई दिल्लीFri, 02 Feb 2024 06:31 PM
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चीनी सैनिकों की ओर से चरवाहों को परेशान करने के वीडियो क्लिप को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने कहा कि चीनी सैनिक किस तरह से भारतीयों को सीमा पर परेशान कर रहे हैं, यह सामने आए वीडियो में साफ झलक रहा है। मगर, आश्चर्य की बात यह है कि भारत सरकार ने इस पर गंभीर प्रतिक्रिया नहीं दी है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को बयान जारी करके कहा, 'हाल ही में चुशुल सेक्टर में जाने से चरवाहों को रोकने और उन्हें परेशान करते हुए चीनी सैनिकों का वीडियो सामने आया था। इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने बेहद हल्की प्रतिक्रिया दी है और यह बिलकुल उचित नहीं है, लेकिन मोदी सरकार से यही उम्मीद की जा सकती है।'

जयराम रमेश ने कहा, 'विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कथित तौर पर कहा कि दोनों पक्ष पारंपरिक चरागाह क्षेत्रों से अवगत हैं और गतिरोध की किसी भी घटना से मौजूदा तंत्र के तहत निपटा जाता है। अगर हम मौजूदा तंत्र की बात करें तो हमने देखा है कि कैसे मोदी सरकार 18 दौर की सैन्य वार्ता के बावजूद पिछले 4 वर्षों से पूर्वी लद्दाख में हमारे सैनिकों और चरवाहों को 2,000 वर्ग किमी क्षेत्र तक जाने में रुकावट डाल रहे चीनियों को रोकने में विफल रही है।' उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के ही अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। सीमा प्रबंधन गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। यह सुनश्चिति करना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि भारतीय चरवाहे भारतीय क्षेत्र के अंदर नागरिक के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें।

'क्या इन टकरावों में हमारे चरवाहों को आई चोट'
कांग्रेस नेता ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर सवाल करते हुए कहा, 'वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के दावे वाले क्षेत्रों में मई 2020 के बाद से चीन के बॉर्डर गार्ड्स द्वारा हमारे चरवाहों को परेशान किए जाने या पीछे धकेले जाने के कितने मामले आए हैं। क्या इन टकरावों में हमारे चरवाहों को किसी तरह की चोट आई है या क्षति हुई है? क्या उन्हें चीनी उत्पीड़न से बचाने के लिए कोई प्रयास किया गया है या वे आईटीबीपी के समर्थन के बिना ही खुद का बचाव करने को मजबूर हैं? जैसा कि वीडियो में दिख रहा है।' 

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