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'चीन ऐसा एशिया नहीं चाहता जहां भारत उसके मुकाबले में खड़ा हो'

पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने बुधवार को कहा कि चीन एक ऐसा बहुध्रुवीय एशिया नहीं चाहता है, जिसमें शक्तिशाली देशों का समूह हो। वह ऐसी किसी व्यवस्था को भी स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें भारत उसकी...

'चीन ऐसा एशिया नहीं चाहता जहां भारत उसके मुकाबले में खड़ा हो'
हिन्दुस्तान लाइव टीम,नई दिल्लीThu, 24 Oct 2019 06:02 AM
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पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने बुधवार को कहा कि चीन एक ऐसा बहुध्रुवीय एशिया नहीं चाहता है, जिसमें शक्तिशाली देशों का समूह हो। वह ऐसी किसी व्यवस्था को भी स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें भारत उसकी ''समानांतर" शक्ति हो। सरन ने भारत-चीन संबंध की प्रकृति का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता की मजबूत भावना है।

उन्होंने कहा, ''यदि मैं चीन के रुख को बयां करूं तो यह बहुत कुछ इस बात से जुड़ा हुआ है कि चीन किस तरह से खुद को...अपने इतिहास को...अपनी सभ्यता को देखता है। इसमें कोई शक नहीं है और चीन पूरी तरह से यकीन करता है कि दुनिया में ना सही, लेकिन एशिया में निश्चित रूप से उसकी स्थिति कहीं अधिक वर्चस्व वाली है।"

पूर्व विदेश सचिव ने चीन के बहु-ध्रुवीय व्यवस्था में यकीन नहीं रखने का जिक्र करते हुए कहा, ''चीन इस बात में यकीन नहीं रखता है कि एशिया एक ऐसा स्थान हो जहां बड़ी शक्तियों का एक समूह हो। सरन ने कहा, ''इसलिए, चीन का मानना है कि शांति, व्यवस्था और सौहार्द्र की सिर्फ एक संभावित गारंटी यह है कि सभी संबद्ध देश यह स्वीकार करें कि शक्तियों के मामले में एक क्रमिक व्यवस्था होनी चाहिए, हर किसी को उस क्रम में उसका स्थान पता होना चाहिए।"

उन्होंने कहा, ''यदि भारत मानता है कि चीन एक ऐसी व्यवस्था को अपनाएगा, जिसमें भारत एक तरह की समानांतर शक्ति हो, तो ऐसा नहीं है। हमें इस बारे में बहुत स्पष्ट होना चाहिए कि चीन का क्या रुख है।" सरन ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि चीन अतिरिक्त भूक्षेत्र पर कब्जा करे, लेकिन यह देश इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि उसे ऐसी स्थिति में होना है, जिसके तहत एशिया में अन्य देशों द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर उसके पास प्रभावी वीटो हो।

पूर्व विदेश सचिव ने कहा, '' वे (अन्य देश) फैसले लेने की स्थिति में नहीं होने चाहिए, जिन्हें चीन अपने हितों के प्रति बैरी मानता है। यह सिर्फ सुरक्षा के मामले में नहीं है बल्कि आर्थिक हित के बारे में भी है।" उन्होंने कहा, ''जहां तक चीन के वर्चस्व वाले दर्जे का सवाल है, वह एक ऐसी स्थिति में रहने की कामना करता है जहां किसी तरह की प्रतिद्वंद्विता या प्रतिस्पर्धा नहीं हो।